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Friday, May 18, 2018

वीर महात्मा नाथूराम गोडसे एक नया दृष्टिकोण


आज का दिन बहुत ही पावन है क्योंकि आज के दिन 19 मई 1910 को बारामती पुणे के एक राष्ट्रभक्त संस्कारित हिन्दू परिवार में एक दिव्य बालक का जन्म हुआ , जो आगे चलकर एक सच्चा समाज सुधारक , विचारक , यशस्वी संपादक व भारत की अखण्डता के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाला महात्मा सिद्ध हुआ, उस वीर का नाम है नाथूराम गोडसे।
नाथूराम गोडसे का असली नाम रामचन्द्र विनायक गोडसे था। उनके पिता विनायक गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे। जब विनायक गोडसे के पहले तीन पुत्र बचपन में ही चल बसे और एक पुत्री जीवित रह गई तो विनायक को आभाष हुआ कि ऐसा किसी शाप के कारण हो रहा है। विनायक गोडसे ने कुलदेवी से मन्नत मांगी कि अगर अब लडका होगा तो उसका पालन - पोषण लडकियों की तरह ही होगा। इस मन्नत के कारण रामचन्द्र को नथ पहननी पडी। बचपन से ही नाक में नथ पहनने के कारण घर वाले उन्हें नाथूराम अथवा नथूराम पुकारने लगे थे।
लडकियों की तरह पाले जाने के बावजूद नाथूराम गोडसे को शरीर बनाने, व्यायाम करने और तैरने का विशेष शौक था। नाथूराम बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक संत तथा क्रान्तिकारी विचारों के समाज सेवक और समाज सुधारक थे। जब भी गॉव में गहरे कुएँ से खोए हुए बर्तन तलाशने होते या किसी बिमार को शीघ्र डॉक्टर के पास पहुँचाना होता तो नाथूराम को याद किया जाता। नाथूराम गोडसे ब्रह्मण - भंगी को भेद बुद्धि से देखने के पक्ष में नही थे। वह छुत - अछुत, जाति, पंथ, वर्ग, रंग भेद आदि कुरूतियों को मानवता के विरूद्ध घोर अन्याय, पाप और अत्याचार मानते थे तथा इसके विरूद्ध कार्य करते थे, इसी कारण से उनका कई बार अपने परिवार वालों से झगडा भी हो जाता था।
बचपन में नाथूराम गोडसे अपनी कुलदेवी की मूर्ति के सामने बैठकर तांबे के श्रीयन्त्र को देखते हुए एकाग्रचित होते तो वह ध्यान की उच्च अवस्था में पहुँच जाते थे और इस अवस्था में ऐसे संस्कृत श्लोकों का पाठ करते थे जो उन्होंने कभी पढें भी नही। इस अवस्था में वह घर वालों के प्रश्नों के उत्तर भी देते थे। लेकिन सोलह वर्ष की आयु के होते ही नाथूराम ने ध्यान - समाधि के दिव्य आनन्द को भी राष्ट्र - धर्म के लिए न्यौछावर कर दिया और परिवार जनों के प्रश्नों के उत्तर देना बन्द कर दिया।
नाथूराम गोडसे को हिन्दू धर्म - संस्कृति से विशेष स्नेह था। वह बाबू पैदा करने वाली मैकालेवादी शिक्षा प्रणाली व अंग्रेजी - उर्दु भाषा को भारत के लिए हलाहल विष के समान घातक मानते थे तथा संस्कार व विज्ञान के समुचित समन्वय पर आधारित मनुष्य बनाने वाली गुरूकुल शिक्षा प्रणाली व हिन्दी भाषा को भारत के लिए आदर्श मानते थे।
पुणे से अपना क्रान्तिकारी विचारों का " हिन्दू राष्ट्र " समाचार पत्र निकाल कर उन्होंने महाराष्ट्र की जनता में राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रबल संचार कर दिया। जब हैदराबाद के निजाम ने अरब साम्राज्यवादी मानसिकता के अनुसार हिन्दुओं पर जजिया कर लगा दिया था तब आर्य समाज के आह्वान पर वीर महात्मा श्रीनाथूरामजी गोडसे के नेतृत्व में आन्दोलनकारियो का पहला दल हैदराबाद गया था और उन्ही के आन्दोलन के कारण हैदराबाद के निजाम को जजिया कर वापिस लेना पडा था।
गांधी जी अपने सामने किसी चुनौती को स्वीकार न कर पाते थे और वह उन्हें अपने रास्ते से हटाने का पूरा प्रयास करते थे। वह चाहे चौरा - चौरी का कांड हो, सांडर्स की हत्या हो, भगत सिंह की फाँसी हो, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का दिल्ली चलो आन्दोलन हो या रॉयल इंडियन नेवी का मुक्ति समर। गांधी जी वीरोचित सशस्त्र क्रान्ति करने वालो की हमेशा अहिंसा की ढाल लेकर आलोचना किया करते थे और चाहते थे कि ब्रिटिस कानून के अनुसार उन्हें कडी से कडी सजा मिले। अहिंसा के मसीहा गांधी जी ने अफ्रीका से लौटने पर भारत भ्रमण किया और प्रथम विश्वयुद्ध ( 1914 से 1918 ) में जर्मनो की हत्या के लिए अंग्रेजी सरकार की सेना में भारतीय युवाओं को भर्ती कराया, तो क्या वह हिंसा इसलिए नहीं थी कि जर्मनो के संहार के लिए वे सैनिक उन्होंने भर्ती कराये थे !
14 - 15 जून 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था कि गांधी जी ने वहाँ पहुँच कर प्रस्ताव का समर्थन कराया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही कहा था कि देश का बटवारा उनकी लाश पर होगा।
नाथूरामजी गोडसे कतई गांधीजी के विरोधी नहीं थे, लेकिन जब गांधीजी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों के कारण हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों की प्रकाष्ठा चरम पर पहुँच गयी, उर्दू को हिन्दुस्तानी के नाम से भारत की राष्ट्रभाषा बनाने का कुचक्र रचा जाने लगा, विश्व की सबसे भयानक त्रासदी साम्प्रदायिक आधार पर भारत का विभाजन करा दिया गया, सतलुज नदी का जल पाकिस्तान को देना और 55 करोड रूपये को भी पाकिस्तान को दिलाने के लिए किया गया गांधी का आमरन अनशन जिसने गोडसे को गांधी का वध करने के लिए मजबूर कर दिया और 30 जनवरी 1948 को गोडसे ने दिल्ली में गांधी का वध कर दिया।
गोडसे ने गांधी वध के 150 कारण न्यायालय के सामने बताये थे , जिन्हें " गांधी वध क्यों " पुस्तक में पढा जा सकता है । एक व्यक्ति की हत्या के अपराध में उन्हें व उनके मित्र नारायण आपटेजी को मृत्युदण्ड दिया गया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया और 15 नवम्बर 1948 को अंबाला ( हरियाणा ) की जेल में वन्दे मातरम् का उद्घोष कर अखण्ड भारत का स्वप्न देखते हुए फाँसी का फंदा चुम कर आत्मबलिदान दे दिया।
नाथूराम गोडसे ने कहा था कि " मेरी अस्थियाँ पवित्र सिन्धू नदी में ही उस समय प्रवाहित करना जब सिन्धू नदी एक स्वतंत्र नदी के रूप में भारत के झंडे तले बहने लगे, भले ही इसमें कितने भी वर्ष लग जाये, कितनी भी पीढियाँ जन्म ले, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना । " आज भी गोडसे का अस्थिकलश पुणे में उनके निवास पर उनकी अंतिम इच्छा पूरी होने की प्रतिक्षा में रखा हुआ है।
वन्दे मातरम्
जय अखण्ड भारत।
- विश्वजीत सिंह अनंत
 राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमानदल

मोदी जी आज संघ के स्वयंसेवक शर्मिंदा हैं


भगवा भी शर्मिंदा है, मायूस तिरंगा झंडा है ।
मोदी जी की नजरों मे, गौभक्त बेचारा गुंडा है ।
गौ माता की रक्षा खातिर, भक्त रात भर जागे है ।
गौभक्तो की दहशत से, सब गौ हत्यारे भागे है ।
गौ माता की जय हो का, जो हर दिन नारा देते है ।
अपने बच्चो का हक मारकर गौ को चारा देते है ।
प्रधानमंत्री हमें बता दो,,,,,,,, खून हमारा खौला है ।
किसको खुश करने की खातिर, उनको गुंडा बोला है।
गौभक्त यदि गुंडे होते, ठंडा हथियार नही होता ।
गौ माता की गर्दन पर चाकू से वार नही होता ।
गौभक्त यदि गुंडे होते, तो छक्के छुड़ा दिए होते ।
भारत भर के सलाॅटर हाऊस, बम से उड़ा दिए होते ।
गौभक्त यदि गुंडे होते, तुम मुँह को खोल नही पाते ।
कसम बाँसुरी वाले की, तुम इतना बोल नही पाते ।
दुनिया भर के झंडो पर, ये जग भी भाग्य विधाता होती ।
सब देशों के अंदर गाय, सकल विश्व की माता होती ।
सबसे ऊँची कुर्सी पर सब खुल्ला खुल्ला बोलोगे ।
कल देशभक्त को आतंकी, संतों को दल्ला बोलोगे ।
तुमको जो लगने वाला, वो पाप दिखाई देता है ।
राष्ट्रवाद के चेहरे मे अब साँप दिखाई देता है ।
एक अरब की उम्मीदो ने, तुमको वहाँ बिठाया था ।
सारे देश के गौभक्तो ने मिलकर जोर लगाया था ।
गाँव गाँव और नगर नगर, वो हर कूचे मे घूमे थे ।
सरकार तुम्हारी बनी देखकर, सभी खुशी से झूमे थे ।
गौ माता के हत्यारे,,, संसद से जाने वाले है ।
हमको लगता था गौ के अच्छे दिन आने वाले है ।
हिन्दू ताकत जुड़ी हुई थी, मोदी आज बिखेर दिया ।
भारतवर्ष की उम्मीदो पर,,,,, तुमने पानी फेर दिया ।
अभी समय है, माफी माँग लो, वक्त नही बर्बाद करो ।
थोड़ा सा गंगाजल पी लो, कृष्ण-कन्हैया याद करो ।
गंगा की जलधार बुद्धि का कचरा साफ कर देती है ।
गैया माँ है बच्चो की हर गलती माफ कर देती है ।
वरना देश की गद्दी से, अब तुम्हें उतारा जायेगा ।
पटना तो तुम हार चुके, अब यू.पी. हारा जायेगा ।
साभार कवि : अमित शर्मा (ग्रेटर नोएडा)

मोदी जी गौरक्षकों पर क्यों भड़के -एक सच्ची कथा
मांस निर्यात में सबसिडी के तड़के से भारत नंबर वन
गौरक्षक के लिए एक्शन और गौ-हत्यारे के लिए सब्सिडी? क्या यहीं हैं भाजपा की विकास नीति ?

भारत स्वाभिमान दल संक्षिप्त परिचय 

हिन्दू वीरों आंखे खोलो करनी अब तैयारी है


*हिन्दु वीरों आंखे खोलो करनी अब तैयारी है
देश और धर्म की रक्षा की अब अपनी बारी है
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हिंदु और हिंदुत्व पर देखो काले बादल छाए हैं
देशधर्म और संस्कृति पे दुश्मन नजर बिछाए हैं
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देख हिन्द के घर औ बाहर गद्दारों का डेरा है
सावधान रहना होगा हर तरफ चोर लुटेरा है
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सदियों से हैं हम बंटे रहे होना साथ जरुरी है
जातिवाद के कीचड़ से उठना आज जरुरी है
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अपनी भारत थी अखंड दुष्टों ने की इसे खंड
हम आपस में बंटे रहे जातियता का ले घमंड
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सदियों से हम जुर्म सहे भारी अत्याचार हुआ
धर्म और आस्था पे वार हुआ खिलवाड़ हुआ
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मुगल तुर्क चंगेजो के कुकृत्य नहीं हम भुले हैं
कामी अलाउद्दीन की घिन्न कृत्य ना भुले हैं
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चौहह हजार विरांगनाऐं पद्मिनी ना भुला हूं
कुद गई वो अग्निकुंड में दर्द नहीं मैं भुला हूं
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कैसे भूलूं औरंगजेब संभाजी को तरपाया था
कैसे भूलं मैं टीपु को जो नरसंहार मचाया था
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कैसे भूलूं मैं शाहजहां की क्रुर शैताानी को
चौदह साल की कन्या से हुई क्रुर हैवानी को
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कैसे भूलूं बाबर को जिसने भारी पाप किया
श्रीराम के मंदिर पर नाम बाबरी लाद दिया
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भुले नहीं सिकन्दर को नगरकोट के मंजर को
खंडित मुर्ति मां दुर्गा की सने खूं से खंजर को
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संयोगिता की कुर्बानी चिश्ती की वो हैवानी
गुरु गोविन्द के बेटे से की उसने जो शैतानी
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मासुम फतेह जोरावर को दिवार में चुनवाया
बंदा वैरागी को गर्म लोहे से चमरी जलवाया
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अकबर दुष्ट दरिंदे ने जाने कितना जुर्म किया
हिन्दुस्तान के लोगों से जीते जी जुल्म किया
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क्या कारण था मुट्ठी भर शैतानों ने राज किया
पृथ्वीराज राणाप्रताप को ना सबने साथ दिया
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जब भी हमने हारा है घर के दुश्मन से हारे हैं
वरना औकात कहां किसमें जयचंदो से हारे हैं
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आज वही पल फिर आया है सावधान रहना
काश्मीर को देख लिए देखे तुम लिए कैराना
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पर हिन्दुत्व है आज भी जिन्दा सदा रहेगा
हिन्दुत्व ना झुका कभी आगे भी नहीं झुकेगा
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कहे कवि उदय शंकर मिट गए मिटाने वाले
भरत वंश की माटी पर द्रोह रचाने वाले
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देशधर्म निजधर्म की रक्षा जन्मों जनम करेंगे
शपथ हमें इस देवभुमि की रक्षा सदा करेंगे*

भारत स्वाभिमान दल परिचय