Wednesday, July 20, 2016

अवैदिक अहिंसा यह नपुंसक मार्ग है

अहिंसा यह वेद, रामायण और महाभारत में कभी नहीं थी । हिन्दुओं के एक भी भगवान अहिंसा रूपी नपुंसकता के मार्ग पर नहीं चले । अहिंसा यह नपुंसक मार्ग है । राष्ट्र और धर्म बर्बाद करने वाली जहरीली दवा है । श्रीकृष्ण जी ने यही कहा की अधर्मी शत्रु को दया मार्ग नहीं बताना, वो जिस अवस्था में है उसी समय उसको समाप्त करो फिर वो निहत्थे क्यू न हो उसको समाप्त करो । हमारे मुर्ख हिन्दू यह कृष्ण मार्ग छोड़कर भ्रामक अहिंसा के मार्ग पर चले और बार- बार पराधीन बने । अखण्ड हिन्दुस्थान के टुकड़े इसी अहिंसा ने किए है । तो भी हिन्दू नही सुधर रहा है । अहिंसा यह विरक्त संतो के जीवन की नीव है । एक समय में सही थी लेकिन आज नहीं । शत्रु यदि हिंसक और निर्दयी रहा तो अहिंसा याने भूखे शेर के सामने बकरी । आज इस्लाम व ईसाई धर्म निर्दयी और तामसिक है । ऐसे समय अहिंसा मार्ग राष्ट्र और धर्म को नष्ट करेगा । अहिंसा मार्ग पर जो चले आज वो धर्म समाप्त होने के मार्ग पर है । आज वो समाप्त होने के कंगार पर है । अहिंसा से पराक्रम और आक्रमकता नष्ट होती है एक हिजड़े समान उसकी अवस्था होती है । वो लड़ नही सकता प्रतिकार कर नही सकता । जो देश और धर्म इस मार्ग पर चले वो नष्ट हो गये और हो रहे है या पराधीन बने । हिन्दू के हर भगवान ने अनेक "वध" किये इसलिए वो कभी भी अहिंसा के मार्ग पर चले नहीं । जो कहते हिन्दू के भगवान अहिंसा वाले थे वो पागल है उनको धर्म का ज्ञान नही है ।
-विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

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मुझे गर्व है कि मैं धर्मपरायण हिन्दू हूँ

!! मुझे गर्व है कि मैं हिन्दू विनाशक धर्मनिरपेक्ष कायर जीव नहीं हूँ। मेरी आस्था सनातन हिंदुत्व में है और आजीवन रहेगी।
मै ईश्वर को परम शक्तिशाली मानता हूँ और अपने प्रभु को प्रयोगशाला की भट्टी में नहीं तौलता क्योंकि मै कायर धूर्त और कमीना धर्मनिरपेक्ष हिन्दू नहीं बल्कि धर्मपरायण हिन्दू हूँ जो धर्म की खातिर जान ले सकता है और जान दे सकता है।
*****
जय श्री राम।

-विश्वजीत सिंह अनन्त
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मुझे गर्व है कि मैं पवित्र सनातन धर्म से हूँ

मुझे गर्व है कि मैं उस पवित्र धर्म से हूँ ।
जिस पर"दूध बहाने" के आरोप लगाए जाते हैं
"खून बहाने" के नहीं ।

मुझे गर्व है की मैं उस धर्म से हूँ ।
जहाँ पशु की गर्दन पर "प्रेम पूर्वक हाथ फेरना" सिखाते हैं
"क्रुरता पूर्वक छुरी फेरना" नहीं ।

मुझे कहना अच्छा लगता है कि मेरे त्यौहार पूजा- यज्ञ करके, मिठाई व पकवान खिलाकर व खाकर मनाएँ जाते हैं,
कोई खून व हड्डियाँ फेंककर, माँस खिलाकर एवम् खाकर नहीं।

मुझे गर्व है कि मैं "सनातन धर्मी वैदिक हिन्दू" हूँ।
🚩 *जय श्रीराम* 🚩

-विश्वजीत सिंह अनन्त
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काश हिन्दू धर्माचार्य ने अपना कर्तव्य निष्ठा के साथ निभाया होता

मित्रो ,
ना पाकिस्तान का अस्तित्व होता, ना भारत में जिहादियों का सम्मान होता, ना मेरे वीर जवानो पर पथराव होता, ना वन्देमातरम का अपमान होता, ना गौ वंश की हत्या होती, ना सनातन धर्म में जातिवाद होता, काश हिन्दू धर्माचार्य ने अपना कर्तव्य निष्ठा के साथ निभाया होता !! जय श्री राम 🚩

-विश्वजीत सिंह अनन्त
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घर- घर बाल संस्कार शाला चलाये

🚩राष्ट्र-धर्म की रक्षा कहने से नहीं करने से होगी, आज के किशोर कल के युवा है, भारत की असली शक्ति है, उनके अन्दर राष्ट्र सेवा व धर्म के संस्कार डालने के लिए भारत स्वाभिमान दल ने "बाल संस्कार शाला" चलाने का निर्णय लिया है ।🚩
👉🏻यदि आप हिन्दू है और आपको लगता है कि हमें अपना धर्म- संस्कृति व स्वाभिमान बचाना है तो अपने यहाँ बाल संस्कार शाला चलाकर 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को धर्म- संस्कृति की शिक्षा दे, राष्ट्र रक्षा के इस कार्य में भारत स्वाभिमान दल सदैव आपके साथ है 🙏🏻👏🏻
🚩आओं अपना कर्तव्य निभाये🚩
🚩घर- घर बाल संस्कार शाला चलाये🚩
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🚩बाल संस्कार शाला चलाकर राष्ट्र-धर्म रक्षा के अभियान में अपनी सक्रीय भूमिका निभाने के इच्छुक सदस्य ध्यान दे, बाल संस्कार शाला सप्ताह में एक दिन रविवार अथवा अन्य किसी निश्चित दिन चलानी होगी, समय अवधि दो घण्टा होगी, कक्षा नि:शुल्क होगी🙏🏻
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-विश्वजीत सिंह अनन्त
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Tuesday, July 19, 2016

" धन्य है भाई तारू सिंह जी "

" क्या इस्लाम स्वीकार करने से मै अमर हो जाऊँगा, क्या मुझे मौत नहीं आयेगी .. ? "

यदि मरना ही है तो मैं अपने गुरु के विचारों सिद्धातों पर चलते हुये हँसते हँसते मरना पसंद करूँगा, मैं हिन्दू धर्म छोड़कर, इस्लाम स्वीकार नहीं करुँगा

यह कहना था भाई तारू सिंह जी का‬

सन् 1745 में जब हिन्दू धर्म रक्षक सिख वीरो को ढूँढ ढूँढ कर कत्ल किया जा रहा था और खोज खबर देने वालों को ईनाम का लालच दिया जा रहा था तब सिखों को जंगलों में शरण लेनी पड़ी ।

पेशे से किसान भाई तारू सिंह जी सिख भाईयों को छुपकर भोजन खिलाया करते थे। पर कोई उनकी मुखबिरी कर देता है जिस वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है । ज़करिया खान के दरबार में काजी द्वारा कुरान व हदीस के आदेश अनुसार उन्हें मौत की सजा सुनाई जाती है ‪‎या फिर‬ केश कटवाकर इस्लाम कबूल करने कहा जाता है

पर तारू सिंह जी प्राण देना पसंद करते हैं

उनके केश जो उन्हें प्राणो से भी अधिक प्यारे थे‬, उन्हें खोपड़ी (बाल के साथ खाल भी) सहित छील कर इस्लामिक नरपिशाच निकाल देते है जिससे कुछ दिनों के बाद‬ उनकी दर्दनाक मृत्यु हो जाती है ।

आज भी पूरी दुनिया के सिख रोज अरदास में उन्हें याद करते हैं ।।

भारत स्वाभिमान दल तथा सनातन संस्कृति संघ भाई तारू सिंह जी को श्रद्धांजली अर्पित करता है

" धन्य है भाई तारू सिंह जी "

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गुरू पूर्णिमा

*हर साल आती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*शिष्यत्व का ध्यान कराती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*गुरु का स्मरण कराती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*शिष्यों को वादे याद दिलाती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*शिष्य की निष्ठा का प्रमाण है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*शिष्य की श्रद्धा की सम्पूर्णता है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*सद्गुरु के वरदानों का उत्सव है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*सद्गुरु केआशीषो का महोत्सव है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*गुरु के सान्निध्य की अनुभूति है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*गुरु सामीप्य का बोध है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*शिष्यत्व के जागरण का उत्सव है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*पूर्ण समर्पण का महोत्सव है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*आत्मस्वरूप का ज्ञान कराती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*देहाभिमान को दूर करती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*श्रद्धा निष्ठा से गुरुमय बनाती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*गुरु भक्ति का सावन लाती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*भाव संवेदना जगाने आती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*शिष्य में देवत्व जगाती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*दिव्य अनुदान वरदान बरसाती है*
*गुरुपूर्णिमा।*

*गुरु के स्नेह की याद दिलाती है*
*गुरुपूर्णिमा।*