Tuesday, September 6, 2016

सुन लो मोदी जी

कमल और केसरिया वाली , गरिमा हमको भाई थी ,
पहली बार लगा था , भारत माता भी मुस्काई थी...
राष्ट्रवाद की डोर थमा दी , देशभक्त मतवाले को ,
दिल्ली की गद्दी बैठाया , चाय बेचने वाले को...
सोचा था अब देश-धर्म की , दशा सुधारी जायेगी ,
देश लूटने वालों की भी , खाल उतारी जायेगी...
सोचा था गद्दारों को अब , सबक सिखाया जाएगा ,
और तिरंगा काश्मीर की , गली-गली लहराएगा...
सोचा था अब एक नियम-कानून बनाया जाएगा ,
मज़हब से ऊपर भारत हो , पाठ पढ़ाया जायेगा...
सोचा था शोषित हिन्दू के , भाग्य सँवारे जाएंगे ,
अवधपुरी में रामलला का , मंदिर भव्य बनाएंगे...
"लेकिन यह क्या ? चित्र सभी विपरीत दिखाई देते हैं ,
भारत की बर्बादी वाले , गीत सुनाई देते हैं...
भारत को गाली देने वाला , खुलकर गुर्राता है ,
श्री नगरी में देशभक्त , बेटों को पीटा जाता है...
"गौ माता का भक्षण करने वाले हंसी उड़ाते हैं ,
भारत की जय बोल रहे जो , निर्मम लाठी खाते हैं...
लोग तुम्हारा छप्पन इंची सीना खूब चिढ़ाते हैं ,
भक्त"हमें बतलाकर हम पर , ताने मारे जाते हैं...
दो वर्षो में अडिग आस्था , आज लगा है खो दी जी ,
सबका साथ विकास सभी का , तुम्हें मुबारक मोदी जी...
अभी तलक संसद की गलियां , गद्दारों से गन्दी हैं ,
अभी तलक कालापानी में , सावरकर जी बंदी हैं...
अभी तलक गीता घायल है , कीचड़-कीचड़ गंगा है ,
"गणपति , होली , दीवाली पर , शांति प्रियों का दंगा है...
भारत को माँ नही समझिये , फर्जी फतवा आता है ,
आज तुम्हारी ख़ामोशी पर , रोती भारत माता है...
हैं मंज़ूर घास की रोटी , लेकिन यह अपमान नही ,
यह राणा का भारत है , बाबर का हिंदुस्तान नही...
आँखे खोलो , वक्त परख लो , राष्ट्रवाद की बात करो ,
या हमको सीरिया बना दो , या सब कुछ गुजरात करो...
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
ये कविता मोदी जी तक जानी चाहिये..... ( प्रकाश जोशी )

Monday, September 5, 2016

ये अंतिम कील ठोंकी है भगवा वेश में छुपे ढोंगियों ने हिंदुओं के विश्वाश में ।

📛अयोध्या में मंदिर ट्रस्ट अपने खर्चे पर करवा रहा 300 साल पुरानी मस्जिद की मरम्मत➖
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ये अंतिम कील ठोंकी है भगवा वेश में छुपे ढोंगियों ने हिंदुओं के विश्वाश में ।।

हिंदुओं के चढ़ाये गए दान , दक्षिणा के पैसे से अयोध्या में अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष महन्थ ज्ञानदास बनवा रहा है अयोध्या में ही रामलला के बगल एक बड़ी मस्जिद ।।

यदि संत समाज में जरा सा भी साहस , शर्म बाकी है तो हिंदुत्व में छुपे इस मौलाना का करे बहिष्कार अन्यथा यदि आप नहीं चाहते कि श्रीराम के लिए चढ़ाई गयी आपकी दक्षिणा और दान किसी मस्जिद निर्माण में काम आये तो ऐसे पापी और ढोंगी कालनेमियो को सम्पूर्ण बहिष्कार करें ।।।।

संतों ये हम हिंदुओं के विश्वाश की अंतिम परीक्षा है अन्यथा हमारे लिए तुम में और लादेन ने कोई फर्क नहीं रह जाएगा ।।।।

भगवा की आड़ में छुपे भेड़ियों का बहिष्कार करो हिंदुओं ।

http://m.navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/ayodhya/faizabad/ayodhya-temple-trust-to-build-mosque-on-its-land-invites-muslims-for-namaz/articleshow/53955026.cms

मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना

राष्ट्रकवि इकबाल ने कहा था-'मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना।' पर हमारी मान्यता इसके प्रतिकूल है। हम चूंकि मजहब को धर्म का नही अपितु संप्रदाय का पर्यायवाची मानते हैं, इसलिए मानव मस्तिष्क में उठने वाले संपूर्ण साम्प्रदायिक विद्वेष भरे कुंठित विचारों, हिंसक वृत्ति और अमानवीय आचरण का जनक हम मजहब को मानते हैं। इसलिए हमारी तो दृढ़ धारणा है कि-

''मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना''

जिस कवि ने इन पंक्तियों को लिखा है कि 'मजहब नही  सिखाता है आपस में बैर रखना' उन्होंने ही एक सत्य को (आश्चर्य भरे शब्दों में) निम्न प्रकार बयान किया-

यूनान, सिख, रोमां, सब मिट गये जहां से।

मगर बाकी है अब तक, नामोनिशां हमारा।।

इकबाल साहब को हमारे (वैदिक धर्म और इस पावन भारत देश के) अब तक बचे रहने पर आश्चर्य हुआ। क्योंकि यूनान, मिस्र और रोम मुस्लिम आक्रमण के समक्ष अपने स्वर्णिम अतीत और महान सांस्कृतिक विरासत को बचा नही सके।

हमारा प्रश्न है कि यूनान, मिस्र, रोमां को डसने वाला कौन था? किसने उनकी सभ्यता को मिटाया? किसने उनकी संस्कृति को, उनके धर्म को, उनकी निजता को उनके गौरवपूर्ण अतीत को और उनकी राष्ट्रीय पहचान को मिटाया?

उत्तर बिल्कुल साफ है-मजहब ने।

जिन लोगों के भी मस्तिष्क में इन महान देशों की सभ्यता को और संस्कृति को मिटाने का विचार आया था वो लोग मजहबी लोग थे। साम्प्रदायिक लोग थे।

इस सत्य को स्वीकार करके कि कुछ अत्यंत गौरवपूर्ण सभ्यताएं और संस्कृतियां संसार में नाम मात्र को शेष रह गयी हैं या समाप्त कर दी गयी हैं, आप यह नही समझ पाये कि इन्हें समाप्त करने की निविदा सिर्फ मजहबी नाम के ठेकेदारों के पास ही थी।

यह वह ठेकेदार हैं जिन्होंने सदा ही उन्माद का व्यापार किया है। इसकी मूल प्रवृत्ति को समझने में आप चूक कर गये-यह देखकर आश्चर्य होता है।

इकबाल साहब! आपकी लेखनी इस भेडिय़े को लताड़ती और इसे मानवता का प्रथम शत्रु घोषित कर इसके वास्तविक स्वरूप को उद्घाटित करती। तब संभव था इसके प्रति हमारे राजनैतिक नेतृत्व की सोच बदल जाती, उसे इसकी वास्तविकता का बोध होता।

इतिहास और मजहब

इतिहास को मानव रक्त के धब्बों से कलंकित करने में मजहब की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान समय में उपलब्ध विश्व के ज्ञात इतिहास में जितने युद्घों का वर्णन हम पढ़ते हैं उनमें से 90 प्रतिशत मजहब के नाम पर लड़े गये युद्घ है। इतिहास में कहीं ईसाइयत अपना परचम लहराने के लिए किसी अन्य मजहब को खाती, डसती और निगलती दिखलाई पड़ती है, तो कहीं जेहाद के नाम पर इस्लाम की तलवार का कहर बरसाया जा रहा है। बात जिहाद की आयी है, जिसका अर्थ होता है-''मजहब के प्रचार के लिए लड़ा जाने वाला युद्घ''

इस अर्थ का इस अवधारणा के साथ कि-'मजहब नही  सिखाता है आपस में बैर रखना' के साथ कैसे तारतम्य स्थापित किया जाए? वास्तव में यही जिहाद ही तो था जिसने विश्व की कितनी ही हंसती खेलती और खाती-पीती सभ्यताओं और संस्कृतियों को समूल नष्ट करा दिया।

पर्याप्त साक्ष्यों के उपलब्ध होते हुए भी यदि अपराधी को दोषमुक्त कर दिया जाता है तो न्यायालय की कार्यप्रणाली संदिग्ध बन जाया करती है इसलिए अपराधी को अपराधी कह कर घोषित किया जाए और उसे दंडित किया जाए। न्याय की यही मांग हुआ करती है। जिन लोगों ने भारत में अपराधी को अपराधी नही माना या नही मानने दिया वे स्वयं अपराधी हैं, राष्ट्रघाती हैं और राष्ट्रद्रोही हैं। झूठी अवधारणाओं की प्रतिस्थापना राष्ट्र की दशा और दिशा को बिगाड़ दिया करती है। आज भारत में यही तो हो रहा है। इस  राष्ट्र की दशा और दिशा दोनों बिगड़ी हुई हैं। क्योंकि हमने इतिहास से कोई सीख नही ली, अपितु अपराधी को दोषमुक्त कर खुला छोड़ दिया। आज यही अपराधी 'साम्प्रदायिकता' के रूप में एक दानव बनकर भारत की एकता,अखण्डता और निजता को पुन: चुनौती प्रस्तुत कर रहा है और हम गाये जा रहे हैं इसका स्तुतिगान-

'मजहब नही सिखाता .........................।'

साम्प्रदायिक लोगों को नही अपितु देशभक्तों को आरोपित किया गया।

भारत के नेताओं के द्वारा इस भ्रमपूर्ण झूठी अवधारणा की प्रतिस्थापना से एक लाभ अवश्य हुआ है कि साम्प्रदायिक लोग साम्प्रदायिक नही रह गये हैं, उन्हें साम्प्रदायिक एकता का सूत्रधार होने का एक प्रमाणपत्र और थमा दिया गया इसलिए उनके अमानवीय कृत्यों पर इस प्रकार लीपापोती की गयी कि आततायी और दुष्ट लोग भी भले लगने लगे।

जैसे भारत में मौहम्मद बिन कासिम का पहला आक्रमण सन 712 ई. में हुआ। उसके इस आक्रमण से लेकर सन 1857 ई. तक जब तक भारत में आधी-अधूरी मुस्लिम सत्ता रही तब तक एक मजहब के लोगों ने दूसरे संप्रदाय के लोगों पर जो अत्याचार ढाये, उन्हें पढक़र अच्छे-अच्छे शूरमाओं के रोंगटे भी खड़े हो जाएंगे। किंतु इन सभी आततायियों को साम्प्रदायिक या मजहबी शासक नही माना गया। क्योंकि मजहब तो आपस में बैर रखना सिखाता ही नही है। अब ऐसे विचारों के प्रतिपादकों से कौन पूछे कि यदि ऐसा था तो फिर किसके लिए ये लोग अत्याचार कर रहे थे? किसके लिए खून बहा रहे थे? और किसके लिए लूटपाट कर रहे थे?हमने अपनी नग्न आंखों से इतिहास में देखा है-

-देवालयपुर (करांची) के मंदिरों को लुटते।

-राजा दाहिर की बेटियों के साथ दुव्र्यवहार होते।

-सोमनाथ के मंदिर को लुटते हुए और कितने ही मंदिरों से अपार धन संपदा को भारत से बाहर जाते हुए।

-कितने ही राजाओं, महान सेनानायकों, वीरों और भारतीय जनसाधारण के साथ अमानवीय अत्याचारों की अनवरत श्रंखला।

-कितनी ही बार के रक्तपात, हिंसा के खेल और जनसंहार को।

-अमानवीय ढंग से पाशविक अत्याचारों के साथ होने वाले धर्मांतरण और मर्मांतक रूप से दी जाने वाली पीड़ाओं को।

-नंगी तलवारों से निर्दयता के साथ बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं का कत्ल और उनके साथ निंदनीय और घृणित अपराध और अत्याचार एवं धर्मांतरण करते हुए। यह सारा खेल किसलिए और किसके द्वारा खेला गया? उत्तर है मजहब के द्वारा। अत: यह धारणा एक सिरे से ही अस्वीकार्य है कि-'मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना।' जो उदाहरण हमने ऊपर दिये हैं, अथवा तथ्य उद्घाटित किये हैं ये सबके सब आज भी घटित होते रहते हैं।

राकेश कुमार आर्य

(लेखक की पुस्तक 'वर्तमान भारत में भयानक राजनीतिक षडय़ंत्र : दोषी कौन?'से)

अल्लाह मर चुका है !

विश्व में अनेकों धर्म और संप्रदाय प्रचलित हैं .लेकिन इस्लाम केवल अपनी मान्यताओं और विश्वास को ही प्रमाण मानता है .और दूसरों को मनवाने का प्रयास करता रहता है .इस्लामी परिभाषा में इस विश्वास को ही ईमान कहा जाता है .भले ही ऐसा विश्वास या मान्यता तर्क सम्मत नहीं हो .मुसलमान उसे सही मानते हैं .साधारण लोग इस्लाम के सुन्नी और शिया समुदाय के बारे में जानते हैं .और उनकी अधिक संख्या होने के कारण उन्हीं को इस्लाम का सही रूप समझ लेते हैं .क्योंकि इन दौनों फिरकों का मुख्य आधार अल्लाह और कुरान ही हैं .और बाकी मान्यताएं जैसे , रसूल , जन्नत -जहन्नम , कियामत , कलमा और नमाज आदि इन दौनों से सम्बंधित हैं .मुसलमान अल्लाह को साबित करने के लिए तर्क देते हैं कि ऐसा कुरान में लिखा है , और जब कुरान की प्रमाणिकता की बात आती है तो , कहते हैं यह अल्लाह की किताब है .जबकि यह दौनों बाते एक दूसरे पर आधारित है .
लेकिन बहुत लोगों को नहीं पता होगा कि मुसलमानों का एक ऐसा काफी बड़ा फिरका भी है जो , अल्लाह और कुरान के अलावा अन्य बातों के बारे में बिलकुल विपरीत विचार रखता है .इस इस्लामी समुदाय को " अलवी-علوية" मुसलमान कहा जाता है .इनके बारे में इसलिए बताना जरुरी है , क्योंकि इन्हीं के साथ अल्लाह की मौत का रहस्य भी जुड़ा हुआ है .इस लिए इस लेख को ध्यान से पढ़िए .
1-अलवी लोगों का परिचय
मुहम्मद साहब के समय में ही मुसलमानों में गुटबंदी और मतभेद होने लगे थे . क्योंकि इस्लाम तर्क हीन मान्यताओं पर आधारित था.और मुहम्मद साहब के ससुर हुकूमत चाहते थे.मुहम्मद साहब अपने चचरे भाई और दामाद अली को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे . क्योंकि उसी के योगदान से इस्लाम फैला था .लेकिन मुहम्मद साहब के ससुर अबू बकर ने छल करके खुद को खलीफा बना लिया . इस से अली के समर्थक अलग हो गए , जिन्हें अज शिया कहा जाता है .ऐसा ही एक फिरका " अलवी" है जिसे " नुसैरिया - نصيريون‎" भी कहा जाता है .यह नाम शियाओं के 11 वें इमाम हसन अल अस्करी इब्ने नुसैर के नाम से लिया गया , जिसका जन्म सन 873 में हुआ था .अलवी अधिकांश सीरिया , लेबनान , इराक और कुछ पाकिस्तान में भी हैं . इनकी कुल संख्या एक करोड़ पैंतीस लाख है .सीरिया का राष्ट्रपति " हाफिज अल असद" भी अलवी है . जो सन 1970 में राष्ट्रपति बना था.
कुछ लोग अलवियों को शिया कहते हैं , लेकिन यह सुन्नी और शिया से बिलकुल अलग और विपरीत विचार रखते हैं .जो इस प्रकार हैं ,
2-अलवी मान्यताएं
सभी अलवी खुद को " अब्दुन्नूर " यानि प्रकाश का दास कहते हैं और मानते हैं कि जड़ चेतन सभी प्रकाश से उत्पन हुए है .और प्रकृति खुद ही चल रही है .और उसको बनाने वाला अल्लाह नहीं है. समस्त जगत सदा से है और हमेशा रहेगा .और आत्मा भी अजर और अमर है .
अलवियों के पांच विभाग हैं ,1 .शम्शिया ( सूर्य के उपासक ) 2 . कमरिया ( चन्द्र के उपासक 3 . मुर्शिद ( सलमान फारसी के भक्त 4 .हैदरिया ( हैदर के भक्त ) 5 . गैबिया ( रहस्यवादी ) लेकिन यह सभी अली इब्न अबूतालिब को ही अल्लाह मानते हैं , जिसने इस पृथ्वी पर अवतार लिया था.इसके अतिरिक्त अलवी आत्मा के पुनर्जन्म को भी मानते है और मानते हैं कि पापी लोग मर कर अन्य प्राणियों कि योनी में जन्म लते हैं . और जन्नत और जगह कोई चीज नहीं है .कर्मों का फल यहीं या अगले जन्म में मिल जाता है 3-कुरान कलमा से इंकार
अलवियों का दावा है कि कुरान अली ने बनायी थी और मुहम्मद को सिखाई थी .और मुहम्मद की मौत के बाद सुन्नी खलीफाओं ने कुरान को बदल दिया था .वर्त्तमान कुरान नकली है . इसलिए अलवी "किताबुल मजमूअ - كتاب المجموع‎ " नामकी किताब पढ़ते हैं जिसमे सिर्फ 16 सूरा (Chapters ) हैं . जिसे सिर्फ फ्रेंच भाषा में अनुवादित किया गया है .इसमे कुरान की वह आयतें हैं जिसमे अली को अल्लाह बाताया गया है , लेकिन कुरान से निकाल दिया गया .इसके अतिरिक्त अलवी " किताबुल मशायख "यानि Manual of Shaikhs और " किताब तालीम दीनिया अल नुसैरिया "भी पढ़ते हैं जिसमे उनके नियम दिए गए हैं अलवी कुरान के साथ नमाज भी नहीं पढ़ते ,यहाँ तक इस्लाम का मुख्य आधार कलमा भी नही पढ़ते , लेकिन कलमा की जगह यह प्रार्थना बोलते है '
"
أشهد أن لا إله إلا == حيدرة الأنزع البطين
"अशहदु अन्ना ला इलाह हैदर अंज अल मतीन "
و لا حجاب عليه إلا == محمد الصادق الأمين
"व् ला हिजाब अलैहि मुहम्मद अस्सादिक अल अमीन "
و لا طريق إليه إلا == سلمان ذو القوة المتين
" व तरीक इलैह इल्ला सलमान जुल कुव्वत अल मतीन "
अर्थ-मैं गवाही देता हूँ कोई अल्लाह नहीं है , सिवा अली इब्न अबू तालिब के , वही इबादत के योग्य है , इसमें पर्दा नहीं कि मुहम्मद सच्चा था और सलमान के अलावा कोई द्वार नहीं है .
"I testify that there is no God but 'Ali ibn-Talib the one to be worshipped, no Veil but the Lord Muhammad worthy to be praised, and no Gate but the Lord Salman al-Farisi the object of love".
अलवी मुसलमानों के वर्त्तमान कलमा को बेकार बता कर उस से इंकार करते हैं , देखिये विडियो
Islamic Kalma rejected by Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri) as he says Ali Mabood
http://www.youtube.com/watch?v=j_c6r58UbsA
अलवी क़ुरबानी की ईद भी नहीं मनाते और न लड़कों की खतना करते हैं .और न किसी को अपने धर्म में शामिल करते हैं
4-कुरान अली की बनायीं है
यद्यपि मुसलमान दावा करते हैं कि कुरान अल्लाह के द्वारा भेजी गयी किताब है किसे उसने अपने रसूल मुहम्मद पर नाजिल किया था .लेकिन अलवियों का दावा है लोग जिसे अल्लाह बता रहे हैं वह अली ही था .जो छुप छुप कर मुहम्मद को कुरान सिखाता था .सुन्नी खलीफाओं ने कुरान में हेराफेरी करके इस बात को दबा दिया था .लेकिन इस आयात से अलवियों कि बात सत्य साबित होती है .
"वह परदे के पीछे रहकर किसी को भी " वही " (कुरान की आयतें ) भेज सकता है , बेशक अली महान तत्वदर्शी है " सूरा-अश शूरा 42 :51
" وَرَاءِ حِجَابٍ أَوْ يُرْسِلَ رَسُولًا فَيُوحِيَ بِإِذْنِهِ مَا يَشَاءُ إِنَّهُ عَلِيٌّ حَكِيمٌ " 42:51
from behind a veil, reveal, by His leave, whatever He wills to revealfor, verily, He is exalted, wise. (42:51
कुरान की यह एक ही आयत यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि अली ही गुप्त रूप से कुरान बनाया करता था.और मुसलमान भी कुरान बनाने वाले को अल्लाह बताते हैं.
5-अलवी त्रैतवाद
हिन्दू और ईसाईयों की तरह अलवी भी तीन शक्तियों पर विश्वास करते है .पहिला अली है जिसे " मायनी " अर्थात Meaning कहा जाता है .दूसरी शक्ति मुहम्मद है जिसे "इस्म" कहा जाता है इस्म अर्थ नाम (Name ) होता है .जिसे अली बनाया है .जैसे नाम मायने के बिना बेकार होता है उसी तरह अली के बिना मुहम्मद बेकार होता है .तीसरी शक्ति सलमान फारसी है जिसे " बाब " अर्थात द्वार (Gate ) कहते हैं.बाब इस्म को मायनी से मिलाने का साधन है .अलवी प्रार्थना में कहते हैं कि मैं बाब के रस्ते से निकल कर इस्म ( मुहम्मद ) को सलाम करता हूँ और आगे बढ़कर मायनी (अली ) की इबादत करता हूँ .अलवी मानते हैं कि अली ही वह शक्ति है जो हरेक युग में अवतार लेता है .और किसी न किसी व्यक्ति के द्वारा किसी को दर्शन और ज्ञान देता है जैसे अली ने सलमान फारसी के द्वारा मुहम्मद को कुरान बना कर दी थी .
अलवी अपनी आत्मशुद्धि के लिए रोज अली , फातिमा , हसन , हुसैन और मुहसिन को याद करते हैं यही उनकी इबादत है . 6-अली ही अल्लाह था
जैसे कोई अपराधी समझता है कि मैंने अपने किये सभी अपराधों के सभी सबूत मिटा दिए हैं .लेकिन उसके कुछ न कुछ सबूत बचे रहते हैं . और उन्हीं सबूतों के अधर पर वह पकड़ा जाता है इसी तरह कुरान में कुछ ऐसे सबूत अभी भी बाकी हैं जिन से आसानी से सिद्ध किया हो जाता है कि अली ही अल्लाह था .कुरान कि इन आयतों को गौर से पढ़िए ,
."और उसी ने इंसान को पैदा किया ,और फिर ससुराली रिश्ता कायम किया " सूरा- फुरकान 25 :54
"وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ مِنَ الْمَاءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهْرًا وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرً"25:54
"उसने दयालुता से अपना हिस्सा दे दिया और, उसे सचमुच उच्च ख्याति मिली " सूरा -मरियम 19 :50
"وَوَهَبْنَا لَهُمْ مِنْ رَحْمَتِنَا وَجَعَلْنَا لَهُمْ لِسَانَ صِدْقٍ عَلِيًّا "19:50
तफसीरुल मीजान में इन आयतों की व्याख्या ने कहा है उसने अली यानि अल्लाह ने जगत बनाया और फिर इन्सान के अवतार में मुहम्मद से ससुराली सम्बन्ध किया . ( अली ने मुहम्मद की बेटी फातिमा से शादी की थी .इसलिए वह मुहम्मद का ससुर बन गया ) दूसरी आयत बताया है में
बताया है कि अली ने कुरान बनाने का सारा श्रेय अपने ससुर को दे दिया . जिस से मुहम्मद का नाम हो गया .और लोग मुहम्मद को ही रसूल कहने लगे .इस आयत में " अलिय्या " शब्द आया है . जो अली का नाम सूचित करती है इसके अतिरिक्त कुरान कि इन आयतों में भी अली का उल्लेख है जो उसे अल्लाह साबित करती हैं , देखिये ,विडियो
Mola Ali is Superior than Allah. Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri)
http://www.youtube.com/watch?v=T8RWj3iyQYA&feature=relmfu
इसके अलावा इन आयतों से भी अली की अल्लाह से तुलना की गयी है
1-वह अली उच्च और सबसे महान है" सूरा -बकरा وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ " 2:255
2-वह अली उच्च और महान है " كَانَ عَلِيًّا كَبِيرً"सूरा - निसा 4:34
3- वह अली उच्च और सबसे महान है "هُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ "सूरा - लुकमान 31:30
4-वह अली सबसे बड़ा और महिमाशाली है " وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ "सूरा- अश शूरा 42:4
सुन्नी चालाकी से अली शब्द को संज्ञा (Noun ) की जगह विशेषण ( Adjective ) बताते हैं . जबकि इन चारों आयातों में अली को सबसे बड़ा और सबसे महान कहा गया है , जो सिर्फ अल्लाह के लिए ही कहा जाता है .इस से भी साबित होता है की अली ही अल्लाह बना हुआ था .और सबूत के लिए देखिये विडियो
Prooving Mola Ali as Allah from Quran. Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri)
http://www.youtube.com/watch?v=4stTblXIknA
7-अल्लाह की मौत
इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट सिद्ध हो गया है कि अल्लाह नाम की कोई शक्ति या वास्तु नहीं थी . यह मुसलमानों का पाखंड था ताकि लोगों को डराकर मुसलमान बनाया जा सके . और कुरान कोई आसमानी किताब नहीं है . वह अली ने बनायीं थी जो अल्लाह बना हुआ था और एक मनुष्य .था
और जैसे सभी मनुष्य एक दिन मर जाते हैं वैसे ही 27 जनवरी सन 661 को (तदनुसार 21 रमजान हि० 40 ) में 63 की आयु में इराक के कूफा शहर में मर गए उनकी हत्या कर दी गयी थी और उसका मजार कुफा में मौजूद है .इस तरह असली अल्लाह उर्फ़ अली तो मर गया है .और मर कर तारा बन गया .उस से डरना और उसकी इबादत बेकार है .
सभी लोग अल्लाह की मौत की तारीख याद रखें और सबको बता दें
https://sacredsites.com/images/middle_east/afghanistan/mazari-sharif-14.jpg

Thursday, September 1, 2016

हींग से करें घरेलू उपचार


1) दांतों में कीड़ा लग जाने पर रात्रि को दांत में हींग दबाकर सोएँ। कीड़े खुद-ब-खुद निकल जाएंगे।
2) यदि शरीर के किसी हिस्से में कांटा चुभ गया हो तो उस स्थान पर हींग का घोल भर दें। कुछ समय में कांटा स्वतः निकल आएगा।
3) हींग में रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है। दाद, खाज, खुजली व अन्य चर्म रोगों में इसको पानी में घिसकर उन स्थानों पर लगाने से लाभ होता है।
4) हींग का लेप बवासीर, तिल्ली में लाभप्रद है।
5) कब्जियत की शिकायत होने पर हींग के चूर्ण में थोड़ा सा मीठा सोड़ा मिलाकर रात्रि को फांक लें, सबेरे शौच साफ होगा।
6) पेट के दर्द, अफारे, ऐंठन आदि में अजवाइन और नमक के साथ हींग का सेवन करें तो लाभ होगा।
7) पेट में कीड़े हो जाने पर हींग को पानी में घोलकर एनिमा लेने से पेट के कीड़े शीघ्र निकल आते हैं।
8) जख्म यदि कुछ समय तक खुला रहे तो उसमें छोटे-छोटे रोगाणु पनप जाते हैं। जख्म पर हींग का चूर्ण डालने से रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।
9) प्रतिदिन के भोजन में दाल, कढ़ी व कुछ सब्जियों में हींग का उपयोग करने से भोजन को पचाने में सहायक होती है।
10) मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानियां जैसे पेट में दर्द और मरोड़ या अनियमित मासिक धर्म में हींग का सेवन करने से फायदे होते हैं। यह औषधि कैंडिडा संक्रमण और ल्यूकोरहोइया से भी छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होता है।
11) सूखी खांसी, अस्थमा, काली खांसी के लिए हींग और अदरक में शहद मिलाकर लेने से काफी आराम मिलता है।
12) हींग की मदद से शरीर में ज्यादा इन्सुलिन बनता है और ब्लड शुगर का स्तर नीचे गिरता है। ब्लड शुगर के स्तर को घटाने के लिए हींग में पका कड़वा कद्दू खाना चाहिए।
13) हींग में कोउमारिन होता है जो खून को पतला करने में मदद करता है और इसे जमने से रोकता है। हींग बढ़े हुए ट्राइग्लीसेराइड और कोलेस्ट्रोल को कम करता है और उच्च रक्तचाप को भी घटाता है।
14) यह औषधि विचार शक्ति को बढ़ाती है और इसलिए उन्माद, ऐंठन और दिमाग में खून की कमी से बेहोशी जैसे लक्षण से बचने के लिए भी हींग खाने की सलाह दी जाती है।
15) अफीम के असर को कम करने में हींग मदद करता है। इसलिए इसे विषहरण औषधि भी कहा जाता है।
16) शोध के अनुसार हींग में वह शक्ति होती है जो कर्क (कैंसर) रोग को बढ़ावा देने वाले सेल को पनपने से रोकता है।