दस तुलसी पत्र
दस काली मिर्च
अदरक पांच ग्राम
सभी को लेकर सिलपर पीसकर 200मिली पानी मे धीमी आंच पर पकायें पानी आधा रहने पर उताकर छान लें व चीनी मिलाकर पियें यह एक मात्रा है !! दिन में तीन बार बनाकर चाय की तरह पियें !! दो तीन दिन में साइनस रोग में लाभ हो जायेगा !! फिर भी दो तीन दिन और पियें !!
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भारत स्वाभिमान दल एक गैर सरकारी सामाजिक स्वयंसेवी संगठन है । इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति की रक्षा व संवर्द्धन करना तथा सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक व आध्यात्मिक सभी प्रकार की व्यवस्थाओं का परिवर्तन कर भूख, भय, अभाव, अशिक्षा व भ्रष्टाचार से मुक्त स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत का पुनर्निर्माण करना है । भारत स्वाभिमान दल से जुड़ने के लिए हमारे वाट्सएप्प नंबर 8755762499 पर संपर्क करें।
Wednesday, September 7, 2016
साइनस का घरेलू उपचार
रोग और पीड़ा मुक्ति के लिए विभिन्न हवन सामग्रियां
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अलग-अलग रोग और पीड़ाओं से मुक्ति के लिए अलग अलग हवन सामग्रियां प्रभावी होती हैं यदि इनका समुचित उपयोग किया जाए तो लाभ बढ़ जाती है |
1. दूध में डूबे आम के पत्ते - बुखार
2. शहद और घी - मधुमेह
3. ढाक के पत्ते - आंखों की बीमारी
4. खड़ी मसूर, घी, शहद, शक्कर - मुख रोग
5. कन्दमूल या कोई भी फल - गर्भाशय या गर्भ शिशु दोष
6. भाँग,धतुरा - मनोरोग
7. गूलर, आँवला - शरीर में दर्द
8. घी लगी दूब या दूर्वा - कोई भयंकर रोग या असाध्य बीमारी
9. बेल या कोई फल - उदर यानी पेट की बीमारियां
10. बेलगिरि, आँवला, सरसों, तिल - किसी भी तरह का रोग शांति
11. घी - लंबी आयु के लिए
12. घी लगी आक की लकडी और पत्ते - शरीर की रक्षा और स्वास्थ्य के लिए !!
...........हर-हर महादेव...........
भारत उद्योग प्रधान देश था
हम एक ग़लत फ़हमी पाल लेते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश था 🤔 ऐसा नहीं है कुछ जगह से जब data पढ़ा तो पता चला 1750 के क़रीब भारत और चीन के छेत्र में कुल विश्व का 73% तक औधोगिक उत्पादन होता था 😳✔ और 1820 में भी यही उत्पादन 60% तक रहा ✅
मतलब साफ़ है सैकड़ों वस्तुयें तब बनती होंगी
अब हमें फिर से आज की आवश्यकता के अनुसार स्थापित करना होगा 👍🏻🙏🏻✔
अब समस्या कहाँ है उस पर ध्यान देना है , हमारे बच्चों का पालन पोषण और शिक्षा पिछले 200 वर्षों में बुरी तरह से बिगड़ी हुई है अब इसे फिर से व्यवस्थित करना होगा, हमें अपने गाँवों शहरों क़स्बों से इसकी शुरुआत अभी हो सकती है 👍🏻 हमें ज़रूरत है कि हमें युवा वर्ग का सहयोग मिले ,
शिक्षा का रूप क्या होगा उसके लिए विचार करने की आवश्यकता है 🙏🏻
हमारी कोशिश है 13-14 उम्र तक के बच्चे अपने को देश और नगर का एक महत्वपूर्ण नागरिक मानने लगें और समाज की वार्ता में भाग लें 👍🏻 अब जो भी जीवन को चलाने के लिए जो भी महत्वपूर्ण पहलू हैं उन्हें वो दो या तीन वर्ष में सीख सकते हैं 🙏🏻
अब अगर हम ग़ुलामी की परम्परा से बाहर निकलना चाहते हों तो हमें अपने देश की परम्पराओं , मान्यताओं , विधाओ और भारतीय स्वभाव के आधार पर एक नए भारत की रचना करनी होगी 👍🏻⛳ हमें अंग्रेजो के बनाए हुए तंत्र को पूरी तरह छोड़ना ही होगा और ऐसा करना होगा जिससे हम 20-25साल में फिर से खड़े हो जायें
हमें मानकर चलना होगा कि हमारे पिछले 200-250 साल एक दम घोर विपत्ति के रहे हैं और इसमें सभी का विनाश हुआ है
अब आप बोलोगे ये सब कैसे होगा अनुभव भाई, देखो आज सबसे पहले हमें अपनी कृषि , वनव्यवस्था और पशुपालन पर ध्यान देना होगा यही हमारे समाज के जरुरी आधार हैं 👍🏻 पश्चिम से आए हुए तरीक़ों को हमें छोड़ना होगा और हमें अपनी व्यवस्थाओं के अनुसार सिंचाई , खेती , बीज का उत्पादन करना होगा 🙏🏻👏🏻👏🏻🙏🏻 और हमें अपनी उपज को बढ़ाना होगा जैसे 1800 के पहले थी , और हमें जल्द से जल्द बाहर से आए हुए अनाज को बन्द करना होगा -- अभी देखा था ना मोदी जी अफ़्रीका से डील करके आए थे दालों के लिए ---- ये सब काम हमें जल्द से जल्द बन्द करने होंगे 👏🏻🙏🏻
और एक बात अगर किसी चीज़ की थोड़ी सी कमी भी है तो क्या हम उस चीज़ की कमी को सह नहीं सकते❓
क्या अपने को थोड़ा सा कष्ट नहीं दे सकते ❓
वैसे भी आप सब जिस परम्परा से आते हैं वहाँ तो त्याग और बलिदान सर्वोपरि है ✔✅
तो ये सब काम आप सब अभी से शुरू करिए शुरू में थोड़ी कठिनाई आएगी पर ज़्यादा दिन तक नहीं 🙏🏻
स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली व संस्कारवान भारत के पुनर्निर्माण के लिए उसके लिए " भारत स्वाभिमान दल " से जुड़िए 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻⛳⛳
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देश के अमर बलिदानियों के सपनों के भारत का पुनर्निर्माण करना है
इसमें आपको भी साथ आना है ।
क्या हिन्दू समाज संजय लीला भंसाली के सेक्युलर हृदय को भय से भरेगा ?
दुष्ट सेक्युलर भाड़ निर्देशिका द्वारा इतिहास को विकृत कर जोधा अकबर नाटक बनाये जाने के बाद अब दूसरे एक और सेक्युलर संजय लीला भंसाली द्वारा मुस्लिम आक्रान्ता अल्लाउदीन खिलजी पर फ़िल्म बनाने की घोषणा की गई है। इस फ़िल्म में भंसाली आक्रान्ता खिलजी द्वारा रानी पद्मावती पर बुरी नियत रखने वाले खिलजी को अथाह प्रेमी के रूप में दिखाने की योजना है। यह प्रयास न केवल खिलजी का प्रतिरोध करने वाले वीर हिन्दू पूर्वजों का अपमान है अपितु इतिहास के सत्य तथ्यों की अनदेखी करना भी है।
खिलजी सुल्तान के कारनामों को ऐतिहासिक प्रमाणों के साथ पढ़िए-
जब जलालुद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर पर चढ़ाई की तो रास्ते में झौन नामक स्थान पर उसने वहाँ के हिन्दू मंदिरों को नष्ट कर दिया। उनकी खंडित मूर्तियों को जामा मस्जिद, दिल्ली, की सीढ़ियों पर डालने के लिए भेज दिया गया जिससे वह मुसलमानों द्वारा सदैव पददलित होती रहें।(बदायुनी : सीताराम गोयल स्टोरी ऑफ इस्लामिक इम्पीरियलिज्म इन इंडिया में उद्धत, पृ. 46 )
किन्तु इसी जलालुद्दीन ने, मलिक छज्जू मुस्लिम विद्रोही को कत्ल करने से, यह कहकर इंकार कर दिया कि 'वह एक मुसलमान का वध करने से अपनी सिहांसन छोड़ना बेहतर समझता है।'(ईलियट एंड डाउसन, खंड-3, पृ. 140) दया और भातृभाव केवल मुसलमानों के लिये है। काफिर के लिये नहीं।(एम. आर. बेग मुस्लिम, डिलेमा इन इंडिया, पृ. 13)
अलाउद्दीन खिलजी जो जलालुद्दीन का भतीजा और दामाद भी था, और जिसका पालन पोण भी जलालुद्दीन ने पुत्रवत किया था, धोखे से, वृद्ध सुल्तान का वध कर दिल्ली की गद्दी पर बैठा। हिन्दुओं से लूटे हुए धन को दोनों हाथों से लुटा कर उसने जलालुद्दीन के विश्वस्त सरदारों को खरीद लिया अथवा कत्ल कर, दिया। जब उसकी गद्दी सुरक्षित हो गई तो उसका काफिरों (हिन्दुओं) के दमन और मूर्तियों को खंडित करने का धार्मिक उन्माद जोर मारने लगा। 1217 ई. में उसने अपने भ्राता मलिक मुइजुद्दीन और राज्य के मुखय आधार नसरत खाँ को, जो एक उदार और बुद्धिमान योद्धा था, गुजरात में कैम्बे (खम्भात) पर, जो आबादी और संपत्ति में भारत का विखयात नगर था, आक्रमण के लिये भेजा। चौदह हजार (14,000) घुड़सवार और बीस हजार (20,000) पैदल सैनिक उनके साथ थे।(अब्दुल्लाह वसाफ : तारीखे वसाफ, खण्ड-3, पृ. 42 (सीताराम गोयल : द कलकत्ता कुरान पेटीद्गान में उद्धत)
मंजिल पर मंजिल पार करते उन्होंने खम्भात पहुँच कर प्रातःकाल ही उसे घेर लिया, जब वहाँ के काफिर निवासी सोये हुए थे। उनीदे नागरिकों की समझ में नहीं आया कि क्या हुआ। भगदड़ में माताओं की गोद से बच्चे गिर पड़े। मुसलमान सैनिकों ने इस्लाम की खातिर उस अपवित्र भूमि में क्रूरतापूर्वक चारों ओर मारना काटना प्रारंभ कर दिया। रक्त की नदियाँ बह गई। उन्होंने इतना सोना और चाँदी लूटा जो कल्पना के बाहर है और अनगिनत हीरे, जवाहरात, सच्चे मोती, लाल औरपन्ने इत्यादि। अनेक प्रकार के छपे, रंगीन, जरीदार रेशमी और सूती कपड़े।(अब्दुल्लाह वसाफ : पूर्वोद्धत, पृ. 43)
'उन्होंने बीस हजार (20,000) सुंदर युवतियों को और अनगिनत अल्पायु लड़के-लड़कियों को पकड़ लिया। संक्षेप में कहें तो उन्होंने उस प्रदेश में भीषण तबाही मचा दी। वहाँ के निवासियों का वध कर दिया उनके बच्चों को पकड़ ले गये। मंदिर वीरान हो गये। सहस्त्रों मूर्तियाँ तोड़ डाली गयीं। इनमें सबसे बड़ी और महत्त्वपूर्ण सोमनाथ की मूर्ति थी। उसके टुकड़े दिल्ली लाकर जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर बिछा दिये गये जिससे प्रजा इस शानदार विजय के परिणामों को देखे और याद करे। (उपरोक्त, पृ. 44)
रणथम्भौर पर आक्रमण के लिये अलाउद्दीन ने स्वयं प्रस्थान किया। जुलाई 1301 ई. में विजय प्राप्त हुई। किले के अंदर तमाम स्त्रियाँ जौहर कर चिता में प्रवेश कर गईं। उसके बाद पुरुष तलवार लेकर मुस्लिम सेना पर टूट पड़े और कत्ल कर दिये गये। सभी देवी देवताओं के मंदिर ध्वस्त कर दिये गये। (ईलियट एंड डाउसन, खण्ड-3, पृ.76 (अमीर खुसरो : तारीखे अलाई))
अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली में कुतुबमीनार से भी बड़ी मीनार बनाने का इरादा किया तो पत्थरों के लिए हिन्दुओं के मंदिरों को तुड़वा दिया गया। उस स्थान पर उन मंदिरों के पत्थरों से ही'कव्बतुल इस्लाम मस्जिद' का निर्माण भी किया जो आज भी शासन द्वारा सुरक्षित राष्ट्रीय स्मारकों के रूप में मौजूद है।
उज्जैन में भी सभी मंदिर और मूर्तियों का यही हाल हुआ। मालवा की विजय पर हर्ष प्रकट करते हुए खुसरो लिखता है कि 'वहाँ की भूमि हिन्दुओं के खून से तर हो गई।' (ईलियट एंड डाउसन, खण्ड-3, पृ.76 (अमीर खुसरो : तारीखे अलाई))
चित्तौड़ के आक्रमण में अमीर खुसरो के अनुसार इस सुल्तान ने 3,000 (तीन हजार) हिन्दुओं को कत्ल करवाया। (उपरोक्त पृ. 77)
'जो वयस्क पुरुष इस्लाम स्वीकार करने से इंकार करते थे, उनको कत्ल कर देना और द्गोष सबको, स्त्रियों और बच्चों समेत, गुलाम बना लेना साधारण नियम था। अलाउद्दीन खिलजी के 50,000 (पचास हजार) गुलाम थे जिनमें अधिकांद्गा बच्चे थे। फीरोज तुगलक के एक लाख अस्सी हजार (1,80,000) गुलाम थे।' ( के. एस. लाल : इंडियन मुस्लिम व्हू आर दे, पृ. 24)
अलाउद्दीन खिलजी के समय, जियाउद्दीन बर्नी की दिल्ली का गुलाम मंडली के विषय में की गई टिप्पणी है कि आये दिन मंडी में नये-नये गुलामों की टोलियाँ बिकने आती थीं। (उपरोक्त) दिल्ली अकेली ऐसी मंडी नहीं थी। भारत और विदेशों में ऐसी गुलाम मंडियों की भरमार थी, जहाँ गुलाम स्त्री, पुरुष और बच्चे भेड़ बकरियों की भाँति बेचे और खरीदे जाते थे।
अलाउद्दीन खिलजी ही क्यों, अकबर को छोड़कर, सम्पूर्ण मुस्लिम काल में, जो हिन्दू कैदी पकड़ लिये जाते थे, उनमें से जो मुसलमान बनने से इन्कार करते थे, उन्हें वध कर दिया जाता था अथवा गुलाम बनाकर निम्न कोटि के कामों (पाखाना साफ करना इत्यादि) पर लगा दिया जाता था। शेष गुलामों को सेना ओर शासकों के बीच बाँट दिया जाता था। फालतू गुलाम मंडियों में बेंच दिये जाते थे।
संजय लीला भंसाली द्वारा ऐसे धर्मांध, मतान्ध, जिहादी, लालची, अत्याचारी, चरित्रहीन तानाशाह पर फ़िल्म बनाकर उसका महिमामंडन करना निश्चित रूप से निंदनीय है।
अब देखते है हिन्दू हिन्दू चिल्लाने वाला हिन्दू समाज अब केवल संजय लीला भंसाली के खिलाफ भाषण देकर, पुतले फूंककर, या धरना देकर इतिश्री कर लेगा जैसा उसने एकता कपूर के साथ किया अथवा वीरोचित मार्ग अपनाकर इन सेक्युलर भाड़ों के हृदय को भय से भरेगा !
- विश्वजीत सिंह अनन्त
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
अँग्रेजी भाषा की गुलामी
भारत में अँग्रेजी भाषा के लिए दिये जाने वाले झूठे कुतर्को का सत्य जरूर पढ़ें । Rajiv Dixit
1) English अंतराष्ट्रीय भाषा है ??
2) English विज्ञान और तकनीकी की भाषा है ??
3) English जाने बिना देश का विकास नहीं हो सकता ??
4) English बहुत समृद्ध भाषा है !
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मित्रो पहले आप एक खास बात जाने ! कुल 70 देश है पूरी दुनिया मे जो भारत से पहले और भारत से बाद आजाद हुए हैं भारत को छोड़ कर उन सब मे एक बार सामान्य हैं कि आजाद होते ही उन्होने अपनी
मातृ भाषा को अपनी राष्ट्रीय भाषा घोषित कर दिया ! लेकिन शर्म की बात है भारत आजादी के 65 साल बाद भी नहीं कर पाया आज भी भारत मे सरकारी सतर की भाषा अँग्रेजी है !
अँग्रेजी के पक्ष में तर्क और उसकी सच्चाई :
1). अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है:: दुनिया में इस समय 204देश हैं और मात्र 12 देशों में अँग्रेजी बोली, पढ़ी और समझी जाती है। संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। पूरी दुनिया में जनसंख्या के हिसाब से सिर्फ 3% लोग अँग्रेजी बोलते हैं। इस हिसाब से तो अंतर्राष्ट्रीय भाषा चाइनिज हो सकती है क्यूंकी ये दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती है और दूसरे नंबर पर हिन्दी हो सकती है।
ये भी पढ़े : Education (शिक्षा) के क्षेत्र मे Bharat और India का अंतर:
2. अँग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है:: किसी भी भाषा की समृद्धि इस बात से तय होती है की उसमें कितने शब्द हैं और अँग्रेजी में सिर्फ 12,000 मूल शब्द हैं बाकी अँग्रेजी के सारे शब्द चोरी के हैं या तो लैटिन के, या तो फ्रेंचके, या तो ग्रीक के, या तो दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों की भाषाओं के हैं। आपने भी काफी बार किसी अँग्रेजी शब्द के बारे मे पढ़ा होगा ! ये शब्द यूनानी भाषा से लिया गया है ! ऐसी ही बाकी शब्द है !
उदाहरण: अँग्रेजी में चाचा, मामा, फूफा, ताऊ सब UNCLE चाची, ताई, मामी, बुआ सब AUNTY क्यूंकी अँग्रेजी भाषा में शब्द ही नहीं है। जबकि गुजराती में अकेले 40,000 मूल शब्द हैं। मराठी में 48000+ मूल शब्द हैं जबकि हिन्दी में 70000+ मूल शब्द हैं। कैसे माना जाए अँग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है ?? अँग्रेजी सबसे लाचार/पंगु/ रद्दी भाषा है क्योंकि इस भाषा के नियम कभी एक से नहीं होते। दुनिया में सबसे अच्छी भाषा वो मानी जाती है जिसके नियम हमेशा एक जैसे हों, जैसे: संस्कृत। अँग्रेजी में आज से 200 साल पहले This की स्पेलिंग Tis होती थी।
अँग्रेजी में 250 साल पहले Nice मतलब बेवकूफ होता था और आज Nice मतलब अच्छा होता है। अँग्रेजी भाषा में Pronunciation कभी एक सा नहीं होता। Today को ऑस्ट्रेलिया में Todie बोला जाता है जबकि ब्रिटेन में Today. अमेरिका और ब्रिटेन में इसी बात का झगड़ा है क्योंकि अमेरीकन अँग्रेजी में Zका ज्यादा प्रयोग करते हैं और ब्रिटिश अँग्रेजी में S का, क्यूंकी कोई नियम ही नहीं है और इसीलिए दोनों ने अपनी अपनी अलग अलग अँग्रेजी मान ली।
3. अँग्रेजी नहीं होगी तो विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई नहीं हो सकती:: दुनिया में 2 देश इसका उदाहरण हैं की बिना अँग्रेजी के भी विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई होटी है- जापान और फ़्रांस । पूरे जापान में इंजीन्यरिंग, मेडिकल के जीतने भी कॉलेज और विश्वविद्यालय हैं सबमें पढ़ाई”JAPANESE” में होती है, इसी तरह फ़्रांस में बचपन से लेकर उच्चशिक्षा तक सब फ्रेंच में पढ़ाया जाता है।
हमसे छोटे छोटे, हमारे शहरों जितने देशों में हर साल नोबल विजेता पैदा होते हैं लेकिन इतने बड़े भारत में नहीं क्यूंकी हम विदेशी भाषा में काम करते हैं और विदेशी भाषा में कोई भी मौलिक काम नहीं किया जा सकता सिर्फ रटा जा सकता है। ये अँग्रेजी का ही परिणाम है की हमारे देश में नोबल पुरस्कार विजेता पैदा नहीं होते हैं क्यूंकी नोबल पुरस्कार के लिए मौलिक काम करना पड़ता है और कोई भी मौलिक काम कभी भी विदेशी भाषा में नहीं किया जा सकता है। नोबल पुरस्कार के लिए P.hd, B.Tech, M.Tech की जरूरत नहीं होती है। उदाहरण: न्यूटन कक्षा 9 में फ़ेल हो गया था, आइंस्टीन कक्षा 10 के आगे पढे ही नही और E=hv बताने वाला मैक्स प्लांक कभी स्कूल गया ही नहीं। ऐसी ही शेक्सपियर, तुलसीदास, महर्षि वेदव्यास आदि के पास कोई डिग्री नहीं थी, इन्होने सिर्फ अपनी मात्र भाषा में काम किया।
जब हम हमारे बच्चों को अँग्रेजी माध्यम से हटकर अपनी मात्र भाषा में पढ़ाना शुरू करेंगे तो इस अंग्रेज़ियत से हमारा रिश्ता टूटेगा।
ये भी पढ़े : फेयर एंड लवली और अन्य क्रीमों का सत्य जानिये क्या हुआ था मद्रास हाईकोर्ट मे
क्या आप जानते हैं जापान ने इतनी जल्दी इतनी तरक्की कैसे कर ली ? क्यूंकी जापान के लोगों में अपनी मात्र भाषा से जितना प्यार है उतना ही अपने देश से प्यार है। जापान के बच्चों में बचपन से कूट- कूट कर राष्ट्रीयता की भावना भरी जाती है।
* जो लोग अपनी मात्र भाषा से प्यार नहीं करते वो अपने देश से प्यार नहीं करते सिर्फ झूठा दिखावा करते हैं। *
दुनिया भर के वैज्ञानिकों का मानना है की दुनिया में कम्प्युटर के लिए सबसे अच्छी भाषा ‘संस्कृत’ है। सबसे ज्यादा संस्कृत पर शोध इस समय जर्मनी और अमेरिका चल रही है। नासा ने ‘मिशन संस्कृत’ शुरू किया है और अमेरिका में बच्चों के पाठ्यक्रम में संस्कृत को शामिल किया गया है। सोचिए अगर अँग्रेजी अच्छी भाषा होती तो ये अँग्रेजी को क्यूँ छोड़ते और हम अंग्रेज़ियत की गुलामी में घुसे हुए है। कोई भी बड़े से बड़ा तीस मार खाँ अँग्रेजी बोलते समय सबसे पहले उसको अपनी मात्र भाषा में सोचता है और फिर उसको दिमाग में Translate करता है फिर दोगुनी मेहनत करके अँग्रेजी बोलता है। हर व्यक्ति अपने जीवन के अत्यंत निजी क्षणों में मात्र भाषा ही बोलता है। जैसे: जब कोई बहुत गुस्सा होता है तो गाली हमेशा मात्र भाषा में ही देता हैं।
॥ मात्रभाषा पर गर्व करो…..अँग्रेजी की गुलामी छोड़ो॥
अभी जो आपने ऊपर पढ़ा ये राजीव दीक्षित जी के (अँग्रेजी भाषा की गुलामी ) वाले व्यख्यान का सिर्फ 10 % लिखा है
हिन्दुओं से नफरत लेकिन हिन्दू लड़कियों से प्रेम ?
वे तुम्हारे त्योहारों से नफरत करते हैं लेकिन तुम्हारी लड़कियों को पटाने के लिए गरबा खेलते हैं और "जय माता की" तक बोलते हैं ।
• वे तुम्हारे मंदिर और मूर्तियों से नफरत करते हैं । लेकिन तुम्हारी लड़कियाँ पटाने के लिए उन्हीं मंदिरों के पास फूल और प्रसाद तक बेचते हैं ।
• वे तुम्हारी दोस्ती से नफरत करते हैं लेकिन तुम्हारी लड़कियों से दोस्ती करने के लिए हाथ में कलावा और गले में दुर्गा, शिव, हनुमान का लाकेट तक पहन लेते हैं ।
• वे स्वतंत्र विचारों से नफरत करते हैं लेकिन तुम्हारी लड़कियों को फँसाने के लिए उनके सामने खुले विचारों का होने का ढोंग करते हैं ।
• वे तुम्हारी तरक्की से नफरत करते हैं लेकिन फिर भी तुम्हारी लड़कियो और महिलाओं पर नज़र रखने के लिए तुम्हारे घर में नौकरी तक कर लेते हैं ।
• वे तुम्हारी पूरी नसल से नफरत करते हैं लेकिन तुम्हें मार कर सिर्फ तुम्हारी सुंदर लड़कियों को अपने हरम में रखने का ख्वाब पालते हैं ।
• वे पढ़ाई लिखाई से नफरत करते हैं लेकिन तुम्हारी लड़कियाँ पटाने के लिए अच्छे स्कूलों और कालेजों में तुम्हारी लड़कियों के साथ ऐडमिशन लेते हैं ।
• वे तुम्हारी लड़कियों और महिलाओं के लिए इस्लाम के सारे नियम ताक पर रख देते हैं ।
{ अरे !! तुम समझते ही नहीं हो वे लोग अपने ही नबी मोहम्मद को तो आत्मसात करके चलते हैं । }
Tuesday, September 6, 2016
सुन लो मोदी जी
कमल और केसरिया वाली , गरिमा हमको भाई थी ,
पहली बार लगा था , भारत माता भी मुस्काई थी...
राष्ट्रवाद की डोर थमा दी , देशभक्त मतवाले को ,
दिल्ली की गद्दी बैठाया , चाय बेचने वाले को...
सोचा था अब देश-धर्म की , दशा सुधारी जायेगी ,
देश लूटने वालों की भी , खाल उतारी जायेगी...
सोचा था गद्दारों को अब , सबक सिखाया जाएगा ,
और तिरंगा काश्मीर की , गली-गली लहराएगा...
सोचा था अब एक नियम-कानून बनाया जाएगा ,
मज़हब से ऊपर भारत हो , पाठ पढ़ाया जायेगा...
सोचा था शोषित हिन्दू के , भाग्य सँवारे जाएंगे ,
अवधपुरी में रामलला का , मंदिर भव्य बनाएंगे...
"लेकिन यह क्या ? चित्र सभी विपरीत दिखाई देते हैं ,
भारत की बर्बादी वाले , गीत सुनाई देते हैं...
भारत को गाली देने वाला , खुलकर गुर्राता है ,
श्री नगरी में देशभक्त , बेटों को पीटा जाता है...
"गौ माता का भक्षण करने वाले हंसी उड़ाते हैं ,
भारत की जय बोल रहे जो , निर्मम लाठी खाते हैं...
लोग तुम्हारा छप्पन इंची सीना खूब चिढ़ाते हैं ,
भक्त"हमें बतलाकर हम पर , ताने मारे जाते हैं...
दो वर्षो में अडिग आस्था , आज लगा है खो दी जी ,
सबका साथ विकास सभी का , तुम्हें मुबारक मोदी जी...
अभी तलक संसद की गलियां , गद्दारों से गन्दी हैं ,
अभी तलक कालापानी में , सावरकर जी बंदी हैं...
अभी तलक गीता घायल है , कीचड़-कीचड़ गंगा है ,
"गणपति , होली , दीवाली पर , शांति प्रियों का दंगा है...
भारत को माँ नही समझिये , फर्जी फतवा आता है ,
आज तुम्हारी ख़ामोशी पर , रोती भारत माता है...
हैं मंज़ूर घास की रोटी , लेकिन यह अपमान नही ,
यह राणा का भारत है , बाबर का हिंदुस्तान नही...
आँखे खोलो , वक्त परख लो , राष्ट्रवाद की बात करो ,
या हमको सीरिया बना दो , या सब कुछ गुजरात करो...
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ये कविता मोदी जी तक जानी चाहिये..... ( प्रकाश जोशी )