Saturday, October 8, 2016

सनातन धर्म के शाश्वत सम्राट

        *ॐश्रीराम: श्रीकृष्ण: हरि:ॐ*
           🌺🍃🌺🍃🌺🍃🌺🍃
        "परिश्रम और पुरुषार्थ" के प्रतीक
      हिन्दुस्थान' मे दो ही 'दिव्य राजा' हुए-
        एक मर्यादा पुरुषोत्तम "श्रीरामचन्द्र"
      और दूसरे जगद्गुरु "श्रीकृष्णचन्द्र" ।

           "हिन्दुओँ" पर तो अब भी
         इन्ही दोनो का राज चलता है ।
      'राजनिष्ठा' तो इन्हीँ के प्रति सम्भव है ।

       'भूमि' और 'द्रव्य' के ऊपर राज्य
        करने वाले कोई ओर होँ, किन्तु
      'हिन्दुओँ' के हृदय पर 'राज्य' करने
      वाले तो ये दो ही "दिव्य स्वरूप" हैँ ॥

          'श्रीमद्भागवत' मेँ लिखा है -
      'जीवन' को सार्थक बनाने के लिए
          चार बातोँ का ध्यान रखना
              अति आवश्यक है ।

        *सबसे प्रमुख है 'पारदर्शिता' !
   अर्थात खुलेपन व ईमानदारी से समाज
     को स्वच्छ एवं साफ-सुथरा रखना !!
     सूचनाओँ को आसानी से प्राप्त कर
           उत्तरदायित्व निभाना !!!

        *दूसरा है जीवन मेँ 'परिश्रम' ।
     परिश्रम से पुरुषार्थी होँगे और उससे
    यश, कीर्ति, धन व शान्ति अर्जित करेँगे ।

            *तीसरी बात है परिवार मेँ
                 'प्रेम' बनाए रखना ।

          *चौथी बात निजी जीवन मेँ
             'पवित्रता' बनाए रखना ।

         *यह सभी है तो "परमात्मा" 
         बहुत जल्दी उतर कर आएगेँ !!
                 
   *"श्रीराम-कृष्ण" का चिन्तन जो जन करते,
      'श्रीराम-कृष्ण' उनकी चिन्ता हरते ।

             *जिस घर 'राम-कृष्ण'
            भजन-कीर्तन के पहरे,
          उस घर पाप का 'रावण-कंस'
               एक पल ना ठहरे ॥
           
               ॐजयश्रीरामॐ
          "रघुपति राघव राजाराम !
            पतित पावन सीताराम !!"
     
       ॐश्रीकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्ॐ
         "यदुपति यादव प्यारे 'श्याम'।
            पतित पावन 'राधेश्याम'॥"

    *धर्मेण हन्यते व्याधि धर्मेण हन्यते ग्रहः!
धर्मेण हन्यते शत्रु धर्मो विश्वस्य जगत: प्रतिष्ठा!
   धर्मेयत्न: सदा कार्यो,धर्म एक: सुखावह:।
    धर्मेण पाल्यते सर्वँ, त्रैलोक्यं सचराचरम्।
   धर्मो रक्षति रक्षित:! यतो धर्मस्ततो जय:!! 

      "सर्वजन हिताय-बहुजन सुखाय"
             "वसुधैव कुटुम्बकम्"
           "यत्र विश्वंभवत्यैकनीड़म्"
            ॥स्वस्ति सर्वदा श्रीरस्तु॥
         *ॐश्रीराम: श्रीकृष्ण: हरि:ॐ*
          🌺🍃🌺🍃🌺🍃🌺🍃
       ॐश्रीराम: कृष्ण: शरणम् मम:ॐ
            ॥श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥
               ॐहर हर महादेवॐ
                  "जय अम्बे"
               ॥हरि: ॐ तत्सत्॥ 
      🍁💎💎🍁💎💎🍁💎💎🍁

सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन का सशक्त विकल्प भारत स्वाभिमान दल

*हिन्दू शेर है, हम हिन्दुओ के पूर्वजो में 9 साल का बालक भरत भी है, जिसने शेर के मुँह में हाथ डालकर दाँत गिने और जिनके नाम पर हमारे देश कानाम भारत पड़ा,।*  
एकोऽहमसहायोऽहं कृशोऽहमपरिच्छद:।
स्वप्नेऽप्येवंविधा चिन्तां मृगेन्द्रस्य न जायते ॥
   सिंह स्वप्न मे भी यह विचार नही करता की मै अकेला हूँ, असहाय हूँ, दुबला हूँ, अनाथ (अनावृत्त) हूँ।।
दुर्भाग्य है कि हम 98% हिन्दू को गांधी जैसे लोगो ने हिंजड़ा बना दिया या बन गए। "अरबपंथी लोगों" के 8-10 साल के बच्चे जानवरो को कटते देखते है, *लेकिन हम 98% हिन्दू डर जाते है, क्यों ?* ऐसे में हमारे बच्चों का भविष्य कितना सुरक्षित रह पायेगा, जब "अरबपंथी लोग की संख्या" संसद (लोक-राज्य सभा) और विधानसभाओ में बढ़ जायेगी..!
*क्या हम आज अपने बच्चों को* कल का, भविष्य का *गुलाम ब्यूरोक्रेट्स डॉक्टर इंजीनयर टीचर आदि ही बना रहे हैं ?*
हम इसे सिद्ध कर सकते हैं, तर्क सच्ची घटनाओं से... कोई शक हो, बताएं हम आपको फोन करके समझ देंगे -  एक राष्ट्रव्यापी सशक्त हिन्दू आंदोलन के लिए भारत स्वाभिमान दल ( चौधरी रमन श्योराण, राष्ट्रीय सदस्यता प्रभारी 074 09947594 ) के साथ जुड़िये, और बदल दीजिये, सम्पूर्ण इंडियन व्यवस्था को।
👉🏽 समय के साथ सब बदल जाता है, सबकुछ, जैसे आज हिन्दुओ हिन्दुत्व की रक्षा के लिए कोई राजनितिक पार्टी नही बची...

👉🏽 इस नवरात्र में आप भी तन-धन से हिन्दू-हिन्दुत्व की रक्षा के लिए कुछ करने का संकल्प ले...

http://www.bharatswabhimandal.org/member.php

Monday, October 3, 2016

भारत के कुरु वंशी महाराज प्रद्योत: अरब, मिस्र देशो पर भगवा लहराया था

भारत के कुरु वंशी महाराज प्रद्योत: अरब, मिस्र देशो पर भगवा लहराया था

खोई हुई इतिहास की ओर-:

भारत के कुरु वंशी महाराज प्रद्योत जिनका राज्यकाल (1367-1317) अखंड भारतवर्ष के सम्राट थे राजधानी महिष्मति थे

१३६७ -१३१७ (ई पू) था इन्होंने असुरों पर आक्रमण किया था और मिश्र अरब देशो पर विजय प्राप्त किया था । दिग्विजयी सम्राट महाराज प्रद्योत इतिहास विलुप्त योद्धा जिन्होंने असुरों का दमन कर विश्व विजय किया था अपने समय के भारतवर्ष के सर्वश्रेष्ठ सम्राट थे प्रचण्ड भुजदण्ड से जीते हुए अनेक राजा उनके चरणों में सिर झुकाते थे। महाराज प्रद्योत का शौर्य अवर्णनीय हैं महाराजा प्रद्योत ने अपने शौर्य- और अद्भुत तेज के साथ भारतभूमि की पावनधारा पर जन्मे इस शूरवीर ने सनातन धर्म ध्वजा को मिश्र अरब देशो पर लहराकर स्वर्णिम इतिहास रच डाले थे ।
अनगिनत युद्ध में से कुछ ख़ास युद्ध का वर्णन मिलता हैं ।
प्रथम युद्ध-: मिश्र के साम्राज्य के राजा थे फ़राओ अमेनोफ़िस चतुर्थ सन १३५५ (ई.पू) इन्होने कोसला पर आक्रमण किया था महाराज प्रद्योत ने आक्रमण का सफल्तापुर्बक प्रतिरोध कर के अमेनोफ़िस पर विजय पा कर भगवा ध्वज मिश्र पर लहराया था ।

द्वितीय युद्ध-: बेबीलोन (Babylon) के असुर साम्राज्य के शासक बुरना द्वितीय १३६० (ई.पू) सिंध पर आक्रमण किया था महाराज प्रद्योत ने असुर साम्राज्य का भयंकर नाश किया था बेबीलोन पर विजय प्राप्त कर असुर साम्राज्य के असुरों को बंदी बनाया था ।

तृतीय युद्ध-: सन १३६३ (ई.पू) महाराज प्रद्योत ने ऐतिहासिक युद्ध लड़ें में एथेंस ग्रीस पर कब्ज़ा कर सेक्रोप्स द्वितीय को हराकर बन्दी बनाकर भारत लाये थे महाराजा प्रद्योत ने अफ्रीका काईरो को सेक्रोप्स से मुक्त करवाया था सेक्रोप्स ने अफ्रीका काईरो के लोगों को बंदी बनाकर पुरुषों से मजदूरी करवाते थे और उनकी औरतों को भोग की वस्तु के तरह भूखे सैनिको के बिच नग्न कर डाल देते थे इनसब से मुक्त कर एक नयी जीवन दिया था महाराज प्रद्योत ने काईरो वासियों को ।। यही होता हैं भारतीय संस्कृति की पहचान दयाभाव , मानवता के रक्षक और मानवता के दुश्मनों का संघार करनेवाला।

चतुर्थ युद्ध-: अश्शूर साम्राज्य अर्थात असीरिया के दानव अशुर पुज़ूर-अशुर तृतीय सन १३६१ (ई.पू) ने त्रिकोणमलाई (वर्तमान में कवरत्ती के नाम से जाने जाते हैं) अरब महासागर पर स्थित होने की वजह से विदेशी आक्रमणकारी इसी जगह पर आक्रमण करते थे ज़्यादातर महाराज प्रद्योत ने आक्रमण का प्रतिरोध करते हुए कई पड़ोसी देशो को असुरों के अधीनता से मुक्त करवाया था पुज़ूर-अशुर के साम्राज्य के विनाश से सनातन धर्म ध्वजा असीरिया की भूमि पर लहराया एवं जैसे की हम जानते हैं सनातन धर्म मतलब स्वाधीन मानसिकता स्वाधीन सरीर सनातन धर्म केरक्षक केवल उसीको घुलाम बनाते हैं जो सनातन धर्म का विनाश चाहता हैं महाराज प्रद्योत ने कई देश जीते पर किसी देश के महिला बच्चो पर कोई अत्याचार नहीं किया उनके सम्मान एवं इज्जत की रक्षा किया आक्रमणकारियों को खदेड़ा बंदी बनाया आक्रमणकारियों को पर उनके औरत एवं बच्चो पर किसी प्रकार का अत्याचार नहीं किये ।। सनातन धर्म ध्वजा के निचे रहकर महाराज प्रद्योत द्वारा जीते गए देश के लोग भी राम-राज्य में रहने का सौभाग्य प्राप्त किये थे ।

पंचम युद्ध-: अशुर-उबाल्लित प्रथम सन १३५१ (ई.पू) विदर्भ राज्य पर ३ लाख की सेना के साथ आक्रमण कर अपने साम्राज्य पर काल को निमंत्रण दिया था महाराज सम्राट महाबली प्रद्योत ने १२००० की सेना के साथ ३ लाख आक्रमणकारियों को हराया था ।

छठा युद्ध-: थूत्मोसे द्वितीय को पराजित कर लेबानन , अरब पर भगवा परचम लहराया था ।

सप्तम युद्ध-: अशुर दुगुल को धुला छठा कर इन देशो पर (अक्कड़ इसीन लार्सा निप्पुर अदाब अक्षक) अपना साम्राज्य स्थापित किया था ।

दिग्विजयी उपाधि प्राप्त किये थे १३० देश एवं अखंड जम्बूद्वीप के नरेश थे उनके भूजाबल के सामने उनके दुश्मन भी अपनी शीश झुकाते थे विदेशी आक्रमणकारी जान बचाना सर्वप्रथम उचित समझते थे ।

संदर्भ-:
१) The text is in a private collection and was published in: Arno Poebel (1955). “Second Dynasty of Isin According to a New King-List Tablet”. Assyriological Studies. University of Chicago Press (15).
२) Babylonia, c. 1000 – 748 B.C.”. In John Boardman; I. E. S. Edwards; N. G. L. Hammond; E. Sollberger. The Cambridge Ancient History (Volume 3, Part 1).
३) Grayson, Albert Kirk (1975). Assyrian and Babylonian Chronicles. Locust Valley, N.Y.
४) Leick, Gwendolyn (2003). Mesopotamia.
५) Kerényi, Karl, The Heroes of the Greeks (1959)

लेखिका-:मनीषा सिंह

Saturday, October 1, 2016

सलमान खान के समर्थन में उतरे योगी आदित्य नाथ

पाकिस्तानी कलाकारों का समर्थन करने वाले सलमान खान पर चौतरफा हमला हो रहा है। ऐसे में पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर सलमान खान के बयान का योगी आदित्यनाथ ने बचाव किया है। आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी लड़ाई कलाकारों के खिलाफ नहीं आतंकियों के खिलाफ है। महंत आदित्यनाथ ने अपने प्रचारित स्वभाव के उलट चौंकाने वाला बयान देकर देशभक्तों को चौका दिया है। जब उनसे सलमान खान के पाकिस्तान कलाकारों के पक्ष में दिये गये बयान के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा पाकिस्तानी कलाकार आतंकवादी नहीं है और भारत सरकार ही उन्हें काम करने के लिए परमिट वीजा देती है। आपको बता दें कि पाकिस्तानी कलाकारों का समर्थन करते हुए सलमान खान ने कहा था कि पाकिस्तानी कलाकार आतंकवादी नहीं है, वो भारत सरकार से वीजा लेकर रह रहे हैं।

भाजपा सांसद आदित्यनाथ बयान के ये भी मायने निकाला जा सकते है कि वे पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में काम करते रहने देने के पक्ष में हैं। देशभक्तों द्वारा सलमान के बयान का विरोध करने के बाद योगी का उनके समर्थन में उतरना हिन्दुओं को हैरत में डाल सकता है। कुछ लोग इसे योगी आदित्य नाथ की सेक्युलर राजनीति की शुरूआत मान रहे हैं।

अभी हाल ही में बीजेपी सांसद और गायक मनोज तिवारी ने सलमान के बयान को गलत बताया। मनोज तिवारी ने कहा था कि पाकिस्तानी कलाकार पाक में भारतीय फिल्मों पर बैन के बारे में क्यों नहीं बोलते। अभिनेता अनुपम खेर भी यह मानते हैं कि अगर पाकिस्तानी कलाकार हमले की निंदा नहीं करते हैं और अपने देश के समर्थन में हैं तो उन्हें वापस भेजना सही है। गायक अभिजीत भी पाकिस्तानी कलाकारों को देश से निकाले जाने के लिए दर्जनों ट्वीट कर चुके हैं। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने तो यहां तक कहा कि भारतीय फिल्मों में काम करने वाले पाक कलाकार जासूस भी हो सकते हैं। ऐसे में आदित्यनाथ का पाकिस्तानी कलाकारों के सर्मथन में बयान आना देशभक्तों को दु:ख रहा हैं।

सलमान खान व उसके बयान का समर्थन करने वाले नेताओं को क्या इतना भी नहीं पता कि शत्रु देश का हर नागरिक शत्रु होता है, भले ही वो सैनिक हो या कलाकार, खिलाडी हो या पत्रकार क्योंकि शत्रु देश का हर नागरिक वहाँ की सरकार को कर चुकाता है जिस से वहां की सरकार और सेना अपनी सारी गतिविधियाँ चलाते हैं।
इस प्रकार शत्रु देश का हर नागरिक जो हमारे देश में शत्रु देश को देशद्रोही गतिविधियाँ चलाने के लिए धन दे रहा है, हमारे लिए आतंकी है। कोई शक ???


दूसरी तरफ पाकिस्तानी कलाकारो व नेताओं के बयानो को देखिये-

उडी में हुवे आतंकी हमले के बाद ना तो किसी पाकिस्तानी कलाकार ने दुःख जताया ना ही किसी ने कुछ कहा. लेकिन जैसे ही भारत ने पकिस्तान के खिलाफ सैनिक कार्यवाही की वैसे ही पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और नेता के कडवे बोल सामने आ गए.


पाकिस्तानी नेता और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान ने हिन्दुस्तान के खिलाफ ज़हर उगला है उन्होंनें भारत के  प्रधानमंत्री  पर भी  निशाना साधा है.  


कुछ दिनों पहले भारत में पाकिस्तानी कलाकार फवाद हुसैन की जम कर आलोचना हो रही थी.


उस दौरान करण जौहर ने बीच बचाव किया था और कहा था कि पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध करना सही नहीं है. जल्द ही करण जौहर की फिल्म “ऐ दिले है मुश्किल” बड़े पर्दे पर आने वाली है जिसमें फवाद हुसैन ने भी काम किया है. 


फवाद खान ने पाकिस्तान पहुँचते ही भारत के खिलाफ ज़हर उगला है. फवाद ने कहा है कि मेरे लिए पाकिस्तान सबसे पहले है और हिन्दुस्तान के लोगों का दिल बहूत छोटा है। जब भारत में पाकिस्तानी कलाकारों को कहा गया की पाकिस्तान का नाम लिए बिना ही उडी हमले की निदा कर दो तो भी उन्होंने मना कर दिया कहा हमारे लिए पाकिस्तान पहले।

भारत के बुद्धिजीवियों, फिल्मी कलाकार व राजनेताओं क्या तुम अब भी पाकिस्तान की तारीफ करोगे! 


Thursday, September 29, 2016

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा - 6

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा

प्रश्न- ज्ञान और कर्म में से किसकी साधना करें ?
उत्तर- अन्धन्तमः प्र विशन्ति येऽविद्यामुपासते |
ततो भूयऽइव ते तमो यऽउ विद्यायाम् रताः || यजुर्वेद 40/12
जो केवल अविद्या, अर्थात केवल भौतिकवादी कर्म में लगे रहते हैं वे गहरे अन्धकार में जाते हैं और जो भौतिकवादी कर्म की अवहेलना कर केवल अध्यात्म वाद में लगे रहते हैं वे उससे भी बढ़कर गहरे अन्धकार में जाते हैं | अब जो कार्य तो करता है पर उसकी लिए ज्ञान की आवश्यकता नहीं समझता वह अँधेरे में है | जो ज्ञानार्जन में तो रत रहता है पर तदनुसार कर्म नहीं करता वह कर्मविहीन ज्ञान के कारण उससे भी गहन अन्धकार में है | ज्ञान और कर्म एक दूसरे के पूरक है, अत: मनुष्यों को इन दोनों की साधना करनी चाहिए |

प्रश्न - भाग्य क्या है?
उत्तर - हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य है।
प्रश्न - सुख और शान्ति का रहस्य क्या है?
उत्तर - सत्य, सदाचार, प्रेम, शौर्य, क्षमा और संघबद्ध रहना सुख का कारण हैं। असत्य, अनाचार, पॉपाचार, कायरता, घृणा और क्रोध का त्याग शान्ति का मार्ग है।
प्रश्न - चित्त पर नियंत्रण कैसे संभव है?
उत्तर - इच्छाएं, कामनाएं चित्त में उद्वेग उत्पन्न करती हैं। इच्छाओं पर विजय चित्त पर विजय है।
प्रश्न - सच्चा प्रेम क्या है?
उत्तर - स्वयं को सभी में देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सर्वव्याप्त देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सभी के साथ एक देखना सच्चा प्रेम है।
प्रश्न- तो फिर मनुष्य सभी से प्रेम क्यों नहीं करता?
उत्तर - जो स्वयं को सभी में नहीं देख सकता वह सभी से प्रेम नहीं कर सकता।
प्रश्न - आसक्ति क्या है?
उत्तर - प्रेम में मांग, अपेक्षा, अधिकार आसक्ति है।
प्रश्न - बुद्धिमान कौन है?
उत्तर - जिसके पास विवेक है।
प्रश्न - कौन हूँ मैं?
उत्तर - तुम न यह शरीर हो, न इन्द्रियां, न मन, न बुद्धि। तुम शुद्ध चेतना हो, वह चेतना जो सर्वसाक्षी है।
प्रश्न - जीवन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर - जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है।
प्रश्न - जन्म का कारण क्या है?
उत्तर - अतृप्त वासनाएं, कामनाएं और कर्मफल ये ही जन्म का कारण हैं।
प्रश्न - जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है?
उत्तर - जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है।
प्रश्न - वासना और जन्म का सम्बन्ध क्या है?
उत्तर - जैसी वासनाएं वैसा जन्म। यदि वासनाएं पशु जैसी तो पशु योनि में जन्म। यदि वासनाएं मनुष्य
जैसी तो मनुष्य योनि में जन्म।
प्रश्न - जाति क्या है?
उत्तर - जो ईश्वरकृत मनुष्य, गाय, अश्व, हाथी, घोड़ा आदि जीव- जन्तु और वृक्षादि समूह है, वह सब जाति कही जाती है |
प्रश्न - तो क्या मनुष्यों में जाति नहीं होती?
उत्तर - हाँ, मनुुष्यों में जाति नहीं होती क्योंकि मनुष्य स्वयं एक जाति है, इसमें ढाई भेद अवश्य होते है- पुरूष, स्त्री और उभयलिंगी(नपुसंक या हिजड़ा) | जो मनुष्य में इनसे अधिक भेद या जाति मानते है वे अज्ञानी है |
प्रश्न - संसार में दुःख क्यों है?
उत्तर - लालच, स्वार्थ, भय, दुष्ट- अधर्मियों को कठोर दण्ड का न दिया जाना संसार के दुःख का कारण हैं।
प्रश्न - ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की?
उत्तर - ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की।
प्रश्न - चोर कौन है?
उत्तर - इन्द्रियों के आकर्षण, जो मन को हर लेते हैं ।
प्रश्न - जागते हुए भी कौन सोया हुआ है?
उत्तर - जो आत्मा को नहीं जानता वह जागते हुए भी सोया है।
प्रश्न - कमल के पत्ते में पड़े जल की तरह अस्थायी क्या है?
उत्तर - यौवन, धन और जीवन।
प्रश्न - नरक क्या है?
उत्तर - इन्द्रियों की दासता नरक है।
प्रश्न - मुक्ति क्या है?
उत्तर - अनासक्ति ही मुक्ति है।
प्रश्न - दुर्भाग्य का कारण क्या है?
उत्तर - अकर्मण्यता, मद और अहंकार।
प्रश्न - सौभाग्य का कारण क्या है?
उत्तर - कर्मण्यता, सत्संग, विवेक और धर्म के प्रति समर्पणभाव। प्रश्न - संसार को कौन जीतता है?
उत्तर- जिसमें सत्य, कर्मनिष्ठा और श्रद्धा है।
प्रश्न - भय से मुक्ति कैसे संभव है?
उत्तर - विवेक से। प्रश्न- मुक्त कौन है?
उत्तर - जो अज्ञान से परे है।
प्रश्न - अज्ञान क्या है? उत्तर - आत्मज्ञान का अभाव अज्ञान है।
प्रश्न- मनुष्य का साथ कौन देता है?
उत्तर - धर्म और कर्म ही मनुष्य का साथ देता है |
प्रश्न - हवा से तेज कौन चलता है?
उत्तर - मन |
प्रश्न - विदेश में साथी कौन होता है?
उत्तर - विद्या |
प्रश्न - विद्या क्या है?
उत्तर - ईश्वर से लेकर पृथ्वीपर्यन्त पदार्थों का सत्य विज्ञान प्राप्त करना तथा उनका यथायोग्य उपयोग करना विद्या है |
प्रश्न - किसे त्याग कर मनुष्य प्रिय हो जाता है?
उत्तर - अहम् भाव से उत्पन्न गर्व के छूट जाने पर |
प्रश्न - कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है?
उत्तर - अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है |
प्रश्न - सर्वोत्तम लाभ क्या है?
उत्तर - आरोग्य |
प्रश्न- मत, पंथ, सम्प्रदाय से बढ़कर संसार में और क्या है?
उत्तर - धर्म |
प्रश्न - कैसे व्यक्ति के साथ की गयी मित्रता पुरानी नहीं पड़ती?
उत्तर - सज्जनों के साथ की गयी मित्रता कभी पुरानी नहीं पड़ती |
प्रश्न - इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
उत्तर - प्रतिदिन हजारों-लाखों लोग मरते हैं फिर भी सभी को अनंतकाल तक जीते रहने की इच्छा होती है, इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?
प्रश्न - तीर्थ क्या है?
उत्तर - जितने विद्याभ्यास, सुविचार, ईश्वरोपासना, धर्मानुष्ठान, सत्य का संग, ब्रह्मचर्य, जितेन्द्रियता, दुष्टों का दमन, धर्म- रक्षा, उत्तम कर्म हैं, वे सब तीर्थ कहाते हैं क्योंकि इन्हें करके जीव दुःखसागर से तर सकते हैं ।
प्रश्न - पुरूषार्थ क्या है?
उत्तर - सर्वथा आलस्य छोड़ के उत्तम व्यवहारों की सिद्धि के लिए मन, शरीर, वाणी और धन से अत्यन्त उद्द्योग (परिश्रम) करने को पुरूषार्थ कहते हैं |

क्रमश: जारी.....

निवेदक: भारत स्वाभिमान दल

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा - 6

सफल, सुरक्षित व समृद्ध जीवन हेतु धर्म शिक्षा

प्रश्न- ज्ञान और कर्म में से किसकी साधना करें ?
उत्तर- अन्धन्तमः प्र विशन्ति येऽविद्यामुपासते |
ततो भूयऽइव ते तमो यऽउ विद्यायाम् रताः || यजुर्वेद 40/12
जो केवल अविद्या, अर्थात केवल भौतिकवादी कर्म में लगे रहते हैं वे गहरे अन्धकार में जाते हैं और जो भौतिकवादी कर्म की अवहेलना कर केवल अध्यात्म वाद में लगे रहते हैं वे उससे भी बढ़कर गहरे अन्धकार में जाते हैं | अब जो कार्य तो करता है पर उसकी लिए ज्ञान की आवश्यकता नहीं समझता वह अँधेरे में है | जो ज्ञानार्जन में तो रत रहता है पर तदनुसार कर्म नहीं करता वह कर्मविहीन ज्ञान के कारण उससे भी गहन अन्धकार में है | ज्ञान और कर्म एक दूसरे के पूरक है, अत: मनुष्यों को इन दोनों की साधना करनी चाहिए |

प्रश्न - भाग्य क्या है?
उत्तर - हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य है।
प्रश्न - सुख और शान्ति का रहस्य क्या है?
उत्तर - सत्य, सदाचार, प्रेम, शौर्य, क्षमा और संघबद्ध रहना सुख का कारण हैं। असत्य, अनाचार, पॉपाचार, कायरता, घृणा और क्रोध का त्याग शान्ति का मार्ग है।
प्रश्न - चित्त पर नियंत्रण कैसे संभव है?
उत्तर - इच्छाएं, कामनाएं चित्त में उद्वेग उत्पन्न करती हैं। इच्छाओं पर विजय चित्त पर विजय है।
प्रश्न - सच्चा प्रेम क्या है?
उत्तर - स्वयं को सभी में देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सर्वव्याप्त देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सभी के साथ एक देखना सच्चा प्रेम है।
प्रश्न- तो फिर मनुष्य सभी से प्रेम क्यों नहीं करता?
उत्तर - जो स्वयं को सभी में नहीं देख सकता वह सभी से प्रेम नहीं कर सकता।
प्रश्न - आसक्ति क्या है?
उत्तर - प्रेम में मांग, अपेक्षा, अधिकार आसक्ति है।
प्रश्न - बुद्धिमान कौन है?
उत्तर - जिसके पास विवेक है।
प्रश्न - कौन हूँ मैं?
उत्तर - तुम न यह शरीर हो, न इन्द्रियां, न मन, न बुद्धि। तुम शुद्ध चेतना हो, वह चेतना जो सर्वसाक्षी है।
प्रश्न - जीवन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर - जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है।
प्रश्न - जन्म का कारण क्या है?
उत्तर - अतृप्त वासनाएं, कामनाएं और कर्मफल ये ही जन्म का कारण हैं।
प्रश्न - जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है?
उत्तर - जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है।
प्रश्न - वासना और जन्म का सम्बन्ध क्या है?
उत्तर - जैसी वासनाएं वैसा जन्म। यदि वासनाएं पशु जैसी तो पशु योनि में जन्म। यदि वासनाएं मनुष्य
जैसी तो मनुष्य योनि में जन्म।
प्रश्न - जाति क्या है?
उत्तर - जो ईश्वरकृत मनुष्य, गाय, अश्व, हाथी, घोड़ा आदि जीव- जन्तु और वृक्षादि समूह है, वह सब जाति कही जाती है |
प्रश्न - तो क्या मनुष्यों में जाति नहीं होती?
उत्तर - हाँ, मनुुष्यों में जाति नहीं होती क्योंकि मनुष्य स्वयं एक जाति है, इसमें ढाई भेद अवश्य होते है- पुरूष, स्त्री और उभयलिंगी(नपुसंक या हिजड़ा) | जो मनुष्य में इनसे अधिक भेद या जाति मानते है वे अज्ञानी है |
प्रश्न - संसार में दुःख क्यों है?
उत्तर - लालच, स्वार्थ, भय, दुष्ट- अधर्मियों को कठोर दण्ड का न दिया जाना संसार के दुःख का कारण हैं।
प्रश्न - ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की?
उत्तर - ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की।
प्रश्न - चोर कौन है?
उत्तर - इन्द्रियों के आकर्षण, जो मन को हर लेते हैं ।
प्रश्न - जागते हुए भी कौन सोया हुआ है?
उत्तर - जो आत्मा को नहीं जानता वह जागते हुए भी सोया है।
प्रश्न - कमल के पत्ते में पड़े जल की तरह अस्थायी क्या है?
उत्तर - यौवन, धन और जीवन।
प्रश्न - नरक क्या है?
उत्तर - इन्द्रियों की दासता नरक है।
प्रश्न - मुक्ति क्या है?
उत्तर - अनासक्ति ही मुक्ति है।
प्रश्न - दुर्भाग्य का कारण क्या है?
उत्तर - अकर्मण्यता, मद और अहंकार।
प्रश्न - सौभाग्य का कारण क्या है?
उत्तर - कर्मण्यता, सत्संग, विवेक और धर्म के प्रति समर्पणभाव। प्रश्न - संसार को कौन जीतता है?
उत्तर- जिसमें सत्य, कर्मनिष्ठा और श्रद्धा है।
प्रश्न - भय से मुक्ति कैसे संभव है?
उत्तर - विवेक से। प्रश्न- मुक्त कौन है?
उत्तर - जो अज्ञान से परे है।
प्रश्न - अज्ञान क्या है? उत्तर - आत्मज्ञान का अभाव अज्ञान है।
प्रश्न- मनुष्य का साथ कौन देता है?
उत्तर - धर्म और कर्म ही मनुष्य का साथ देता है |
प्रश्न - हवा से तेज कौन चलता है?
उत्तर - मन |
प्रश्न - विदेश में साथी कौन होता है?
उत्तर - विद्या |
प्रश्न - विद्या क्या है?
उत्तर - ईश्वर से लेकर पृथ्वीपर्यन्त पदार्थों का सत्य विज्ञान प्राप्त करना तथा उनका यथायोग्य उपयोग करना विद्या है |
प्रश्न - किसे त्याग कर मनुष्य प्रिय हो जाता है?
उत्तर - अहम् भाव से उत्पन्न गर्व के छूट जाने पर |
प्रश्न - कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है?
उत्तर - अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है |
प्रश्न - सर्वोत्तम लाभ क्या है?
उत्तर - आरोग्य |
प्रश्न- मत, पंथ, सम्प्रदाय से बढ़कर संसार में और क्या है?
उत्तर - धर्म |
प्रश्न - कैसे व्यक्ति के साथ की गयी मित्रता पुरानी नहीं पड़ती?
उत्तर - सज्जनों के साथ की गयी मित्रता कभी पुरानी नहीं पड़ती |
प्रश्न - इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
उत्तर - प्रतिदिन हजारों-लाखों लोग मरते हैं फिर भी सभी को अनंतकाल तक जीते रहने की इच्छा होती है, इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?
प्रश्न - तीर्थ क्या है?
उत्तर - जितने विद्याभ्यास, सुविचार, ईश्वरोपासना, धर्मानुष्ठान, सत्य का संग, ब्रह्मचर्य, जितेन्द्रियता, दुष्टों का दमन, धर्म- रक्षा, उत्तम कर्म हैं, वे सब तीर्थ कहाते हैं क्योंकि इन्हें करके जीव दुःखसागर से तर सकते हैं ।
प्रश्न - पुरूषार्थ क्या है?
उत्तर - सर्वथा आलस्य छोड़ के उत्तम व्यवहारों की सिद्धि के लिए मन, शरीर, वाणी और धन से अत्यन्त उद्द्योग (परिश्रम) करने को पुरूषार्थ कहते हैं |

क्रमश: जारी.....

निवेदक: भारत स्वाभिमान दल