Friday, May 18, 2018

भारत स्वाभिमान दल परिचय



भारतवर्ष एक ऐसा देश है जो कभी सोने का शेर था  हर व्यक्ति आनन्दित, हर परिवार संपन्न, सबके पास अपने काम और सब कामो में व्यस्त, सर्वोच्च स्तर का चरित्र,  बौद्धिक स्तर पर भारत का कोई मुकाबला नहीं था, उच्च स्तरीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति, आयुर्वेदिक और शल्य चिकित्सा, तकनीकि विज्ञान और खोज में सबसे आगे, सबसे पहले अंतरिक्ष विज्ञान का ज्ञाता, संस्कार और परम्परा में पूरे विश्व का गुरु और सिरमौर कहलाने वाला भारतवर्ष आज वासनानशा, भ्रष्टाचार और व्याभिचार और आलस्य में डूबा हुआ है।

हर तरफ चोरी, दुश्मनी, हत्या, बलात्कार, धरना प्रदर्शन, मुफ्तखोरी, दलाली, घूसखोरी और अपराध अपने चरम पर है, कोई संतुष्ट नहीं, सबके अंदर असुरक्षा की भावना घर कर चुकी है, कुछ भी निश्चित नहीं लगता।

जो समाज का नेतृत्व करते है, जिनके इशारे मात्र पर कुछ बदल सकता है, वो स्वाभिमान जागरण, विकास और राष्ट्रीय एकता के स्थान पर, विनाश और साम्प्रदायिक तुष्टिकरण कर विखण्डन की बात करते है, अपने राजनैतिक हित के लिए हमेशा धर्म के आधार पर भेदभाव करते है, जाती और सम्प्रदाय की बातो में उलझाकरउकसाकर भड़काकर लडवाया करते है, और वोट की राजनीति करते है, उनके लिए हम वोट बैंक के अलावा और कुछ नहीं।

जो विकास और जानकारी के स्रोत है, जो जन जन तक जानकारी पहुचाने के माध्यम है, वो अश्लीलता परोसकर, विदेशी कम्पनियो का व्यापार बढ़ाकर, कमीशन के रूप में पैसा बटोर रहे है, भारत के नागरिकों को संविधानिक रूप से साम्प्रदायिक आधार पर बांटने वाले कानून लागू कर दिये गये है।

जिनके हाथ में देश का भविष्य है, जो पीढ़ियों का निर्माण करते है, जो अपने द्वारा बच्चों को चरित्रव्यवहार, सामाजिक और भविष्य निर्माण की कला सिखाते है, उनको कानूनों में बांधकर अपंग बना दियाऔर थोप दी विदेशी शिक्षा व्यवस्था।

आज सब व्यवस्थाओं में घुन लग गया है,  कुछ स्पष्ट है और  ही सापेक्ष, अपनी मूल प्रकृति को भूलकर दूसरो की व्यवस्था और गंदे संस्कारो से प्रभावित होकर हम विनाश की अंधी दौड़ में शामिल हो गए है जिसका परिणाम शायद एक दिन सीरिया जैसा हो सकता है, क्या आप चाहते हो कि आप के बच्चे जिन्हें आप अपनी जान से ज्यादा प्यारकरते हो, ऐसे माहौल में जिए, ऐसी व्यवस्थाये विनाशकारी है इनको बदलना होगा।

ऐसे में देश के युवाओ और बुद्धिजीवी लोगो ने मिलकर अपने देश के स्वर्णिम इतिहास का अध्ययन कर  क्रांतिकारी, योगियो और संतो के जीवन से प्रेरणा लेकर "भारत स्वाभिमान दलसंगठन की स्थापना की है, और उन सिद्धांतो पर कार्य करने का निर्णय लिया जिन पर चलकर यह देश खुशहालसंपन्नशक्तिशाली, संस्कारवान और विश्वगुरु था।आइये मिलकर संस्कारित, खुशहाल, समृद्ध, दिव्य और तेजस्वी भारत का निर्माण करे। सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए संगठित होना अति आवश्यक है।

भारत स्वाभिमान दल देश के प्रत्येक आयु के विचारशील, प्रगतिशील और राष्ट्रभक्तों का इस महान कार्य में सहयोग के लिए आवाहन करता है।
भारत स्वाभिमान दल के सदस्य बनकर सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के इस जन आंदोलन में अपनी सक्रीय भूमिका का निर्वह्न करें।

सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तनराजनैतिक शुचिता था भारत के पुर्नोत्थान के लिए अधिक से अधिक संख्या में तनमनधन के साथ संगठन से जुड़ें।भारत स्वाभिमान दल आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करता हैं। सदस्यता के लिए 08755762499 पर सम्पर्क करें।

वन्दे मातरम्
भारत माता की जय

ॐ शिवोहं शिवोहं अहं ब्रह्मास्मि



भगवान को समर्पित होने पर
सबसे पहिले तो हम जाति विहीन हो जाते हैं,
फिर वर्ण विहीन हो जाते हैं,
घर से भी बेघर हो जाते हैं,
देह की चेतना भी छुट जाती है
और मोक्ष की कामना भी नष्ट हो जाती है
विवाह के बाद कन्या अपनी जाति, गौत्र और वर्ण
सब अपने पति की जाति, गौत्र और वर्ण में मिला देती है
पति की इच्छा ही उसकी इच्छा हो जाती है
वैसे ही भगवान को समर्पित होने के बाद हमारी जाति आदि क्या होंगे ?
भगवान् की जाति क्या है ?
भगवान् का वर्ण क्या है ?
भगवान् का घर कहाँ है ?
हम कौन हैं ?
इन सब प्रश्नों के उत्तर जिज्ञासु लोग सोचें
मेरे लिए तो ये सब महत्वहीन हैं
पर एक बात तो है कि जो कुछ भी परमात्मा का है
सर्वज्ञता, सर्वव्यापकता, सर्वशक्तिमता आदि आदि
उन सब पर हमारा भी जन्मसिद्ध अधिकार है
हम उनसे पृथक नहीं हैं
जो भगवान की जाति है वह ही हमारी जाति है
जो उनका घर है वह ही हमारा घर है
जो उनकी इच्छा है वह ही हमारी इच्छा है
Thou and I art one.
Reveal Thyself unto me.
Make me a perfect child of Thee.
तुम महासागर हो तो मैं जल की एक बूँद हूँ
जो तुम्हारे में मिलकर महासागर ही बन जाती है
तुम एक प्रवाह हो तो मैं एक कण हूँ
जो तुम्हारे में मिलकर विराट प्रवाह बन जाता है
तुम अनंतता हो तो मैं भी अनंत हूँ
तुम सर्वव्यापी हो तो मैं भी सदा तुम्हारे साथ हूँ
जो तुम हो वह ही मैं हूँ मेरा कोई पृथक अस्तित्व नहीं है
मैं तुम्हारा अमृतपुत्र हूँ, तुम और मैं एक हैं
I am the polestar of my shipwrecked thoughts .....
मैं ध्रुव तारा हूँ मेरे ही विखंडित विचारों का,
मैं पथ-प्रदर्शक हूँ स्वयं के भूले हुए मार्ग का.
मैं अनंत, मेरे विचार अनंत,
मेरी चेतना अनंत और मेरा अस्तित्व अनंत.
मेरा केंद्र है सर्वत्र,
परिधि कहीं भी नहीं.
मेरे उस केंद्र में ही मैं स्वयं को खोजता हूँ,
बस यही मेरा परिचय है.
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ॐ शिवोहं शिवोहं अहं ब्रह्मास्मि ।। ॐ ॐ ॐ ।।
ॐ शिव ।। ॐ तत्सत् ।। ॐ ॐ ॐ ।।
- विश्वजीत सिंह अनंत
सनातन संस्कृति संघ/भारत स्वाभिमान दल