Wednesday, November 30, 2016

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है।

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है। गाय से उत्सर्जित एक-एक पदार्थ में ब्रह्म उर्जा , विष्णु उर्जा और शिव उर्जा भरी हुई है।  गाय को आप कितने ही प्रदूषित वातावरण में रख दीजिये या कितना ही प्रदूषित जल या भोजन करा दीजिये गाय उस जहर रूपी प्रदूषण को दूध , दही , गोबर , गौ-मूत्र , या साँस के रूप में कभी बाहर नहीं उत्सर्जित करती है बल्कि गाय उसे अपने शरीर में ही धारण कर लेती है। आपको जो भी देगी विशुद्ध देगी।

गाय का गोबर : - गाय के गोबर में 23 % आक्सीजन की मात्रा होती है। गाय के गोबर से बनी भस्म में 45 % आक्सीजन की मात्रा मिलती है।  गाय के गोबर में मिट्टी तत्व है यदि आपको परिक्षण के लिए शुद्ध मिट्टी चाहिए तो गाय के गोबर से शुद्ध मिट्टी तत्व का उदहारण आपको कही नहीं मिलेगा। आक्सीजन भी भरपूर है यानि गोबर से ही वायु तत्व की पूर्ति हो रही है।
* यह ध्यान रखें कि गाय के गोबर की भस्म बनाने का एक तरीका है , तभी आपको परिष्कृत शुद्ध आक्सीजन तथा पूर्ण तत्व मिल पायेगा। गाय के गोबर की भस्म मकर संक्रांति के बाद बनायीं जाती है।

गाय का दूध :-  गाय के दूध में अग्नि तत्व है। तथा इस दूध के भीतर 85 % जल तत्व है।

गाय की दही : - गाय की दही में 60 % जल तत्व है। गाय की छाछ गाय के दूध से 400 गुना ज्यादा लाभकारी है। इसलिए गाय के छाछ को अमृत कहा जाता है।  इसमें इतने अधिक पोषक तत्व होते हैं कि आप सोच भी नहीं सकते है।
छाछ बनाने की अलग-अलग विधियाँ है। छाछ को किस जलवायु में कितनी मात्रा में पानी  मिलाकर बनाना है इसका अलग-अलग तरीका है। तभी यह पूरा लाभ प्रदान करती है।

गाय का मक्खन : - गाय के मक्खन में 40% जल तत्व है। मक्खन अद्भुत है इसके अन्दर भरपूर ब्रह्म उर्जा होती है। ब्रह्म उर्जा के बिना मानव के अन्दर सत्वगुण नहीं आते हैं। विना सत्वगुण के सवेदनशीलता शून्य हो जाती है। मान लीजिये किसी ने गुंडेगर्दी से आपके गाल पर थप्पड़ मार दिया तो आपके अन्दर यदि संवेदनशीलता नहीं है तो आप वर्दास्त कर लेंगे अन्यथा आप उस थप्पड़ का जरुर जबाब देंगे।
आज बाजार में बटरआयल चल रहा यानि दूध से निकाली गयी क्रीम का आयल जो आपके भीतर संवेदनशीलता ख़त्म कर रहा है। भगवान् श्री कृष्ण ने मक्खन के कारण ही इतनी आसुरी शक्तियों का नाश किया।

गोबर और गौ-मूत्र पर आपने अनेक लेख पढ़े  होंगें लेकिन ......
अगर आप गौ-भस्म को ध्यान से पढ़ेगें तो पायेंगे कि यह गौ भस्म ( राख ) आपके लिए कितनी उपयोगी है। साधू -संत लोग संभवतः इन्ही गुणों के कारण इसे प्रसाद रूप में भी देते थे। जब गोबर से बनायीं गयी भस्म इतनी उपयोगी है तो गाय कितनी उपयोगी होगी यह आप सोच सकते है। आपको एक लीटर पानी में 10-15 ग्राम  यानि 3-4 चम्मच भस्म मिलाना है , उसके बाद भस्म जब पानी के तले में बैठ जाये फिर इसे पी लेना है।  इससे सारे पानी की अशुद्धि दूर हो जाएगी और आपको मिलेगा इतने पोषक तत्व। यह लैबोटरी द्वारा प्रमाणित है।
* तत्व रूप / ELEMENT FORM

१. ऑक्सीजन  O = 46.6 %
२. सिलिकॉन  SI  = 30.12 %
३. कैल्शियम Ca = 7.71 %
४. मैग्नीशियम Mg = 2.63 %
५.  पोटैशियम K = 2.61 %
६. क्लोरीन CL = 2.43 %
७. एल्युमीनियम Al  = 2.11 %
८. फ़ास्फ़रोस P = 1.71 %
९. लोहा Fe = 1.46 %
१०. सल्फर S =1.46 %
११. सोडियम Na = 1 %
१२. टाइटेनियम Ti = 0.19 %
१३. मैग्नीज Mn =0.13 %
१४. बेरियम Ba = 0.06 %
१५. जस्ता Zn = 0.03 %
१६. स्ट्रोंटियम Sr = 0.02 %
१७. लेड Pb = 0.02 %
१८. तांबा Cu = 80 PPM
१९. वेनेडियम V=72 PPM
२०. ब्रोमिन Br = 50 PPM
२१. ज़िरकोनियम Zr 38 PPM

आक्साइड रूप :-

१. सिलिकाँन डाइऑक्साइड -
SIO2 = 64.44%
२. कैल्शियम ऑक्साइड
CaO =10.79 %
३. मैग्नीशियम ऑक्साइड
MgO = 4-37 %
४. एल्युमीनियम ऑक्साइड
AI2O3 = 3.99%
५. फास्फोरस पेंटाक्साइड
P2O5 = 3.93%
६. पोटेशियम ऑक्साइड
K2O = 3.14 %
७. सल्फर ऑक्साइड
SO3 = 2.79%
८. क्लोरीन  CL=2.43 %
९.  आयरन ऑक्साइड
Fe2O3=2.09%
१०. सोडियम ऑक्साइड
Na2O = 1.35 %
११.  टाइटेनियम ऑक्साइड
TiO2 = 0.32%
१२. मैंगनीज ऑक्साइड
MnO = 0.17 %
१३.  बेरियम ऑक्साइड
BaO = 0.07 %
१४.  जिंक ऑक्साइड
ZnO = 0.03%
१५.  स्ट्रोंटियम ऑक्साइड
SrO = 0.03%
१६. लेड ऑक्साइड
PbO = 0.02%
१७. वेनेडियम ऑक्साइड
V2O5 = 0.01 %
१८. कॉपर ऑक्साइड
CuO = 0.01%
१९. जिरकोनियम ऑक्साइड
ZrO2 =52 PPM
२०. ब्रोमिन Br = 50 PPM
२१.  रुबिडियम ऑक्साइड
Rb2O = 32 PPM

शायद आपको मेरी बात समझ में आ चुकी होगी कि शरीर में आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए यह गोबार की भस्म कितनी उपयोगी है।

इसको बनाने का तरीका है यह प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के बाद देशी गाय के गोबर बिना जमीन पर स्पर्श किये किसी कुचालक टोकरी ( प्लास्टिक को छोड़कर ) सूर्योदय से  पूर्व गाय के नीचे से लेना होता है। इसके बाद इसे किसी और सुचालक बांस की टोकरी या घास की टोकरी से दबाकर पतला  करके तीन घंटे के लिए छोड़ दें जब इसका रस सूख जाए। तो इसके सूखे उपले को घी की बत्ती से जलाकर भस्म बनायीं जाती है।

कल आपको गोबर से बनाई गयी भस्म के विषय में बताया कि भस्म हमारे लिये कितनी उपयोगी है , भस्म के अन्दर कितने रासायनिक घटक किस-किस मात्रा में विद्यमान है।

गाय का दूध :-  गाय के दूध में अग्नि तत्व है। तथा इस दूध के भीतर 85 % जल तत्व है। आजकल 70 % लोग थैलियों का दूध पी रहे हैं जब पूरे भारत में 20 से 22% प्रतिशत ही दूध उपलब्ध है तो बाकी का 80% दूध कहाँ से आ रहा है ....?
डेनमार्क , अर्जेंटीना , मलेशिया आदि अनेक देशों से A1 टाइप दूध का पाउडर भारत आयात करता है फिर उसको प्रोसेस करके उसमे तीव्र रासायनिक जहर " हाइड्रोजन पराऑक्साइड व सोडियम लोरेन सल्फेट " मिलाया जाता है। इतना ही नहीं  हमारे स्वास्थ्य से पूरी तरफ खिलवाड़ कर रही अनेक डेयरियों में दूध का बहुत बड़ा काला धंधा चलता है उसमे सोयाबीन का दूध , यूरिया था अनेक रसायन मिलाकर कृतिम दूध को तैयार करके बेचते हैं। आप सरकार या सरकार के किसी भी जिम्मेदार कर्मचारी से पूंछेंगे वह नहीं बताएगा। क्योंकि सच्चाई बताने के लिए उन्हें मना किया गया है।  जो डेयरी दूध वह आपको पिला रहा है वह जहर युक्त दूध खुद उसके घरो में प्रयोग नहीं होता है।
जो बालक बचपन से ही गाय का दूध पीते है , उनकी बुद्धि तो कुशाग्र होती ही है साथ ही साथ उनका ब्रह्म तेज भी बढ़ता है जिसके कारण उसके अन्दर " ब्रह्मचर्य " साधने की शक्ति आ जाती है उसका औरा मंडल बढ़ जाता है। बुद्धि के तीनो रूप  धी , धृति , स्मृति असामान्य होती है। इसीकारण उसके भीतर सात्विक गुणों का अधिकता पायी जाती है। उसका पुरुषार्थ तेजोमय होता है।

गौ-मूत्र :- गाय के मूत्र में विषय में आपने कई बार पढ़ा होगा कि गौ-मूत्र के अन्दर अनेक जीवनपयोगी रासायनिक तत्व हैं। गौ -मूत्र में भगवन धन्वतरि का निवास है , जो देवताओं के वैद्य है। अकेले गौ-मूत्र के अन्दर 70 से भी अधिक विमारियों को ख़त्म करने की शक्ति। गौ-मूत्र ही एक ऐसी औधधि है , जिससे वात-पित्त और कफ नियंत्रित होता है। गौ -मूत्र से टी वी , दमा , अस्थमा , कब्ज , कैंसर , वात व कफ के अनेक पेट रोग ठीक होते हैं। शुद्ध जल का यदि लैबोटरी टेस्ट हो तो गौ-मूत्र से बेहतर कोई दूसरा उदहारण नहीं है। आप गौ-मुख से भी शुद्ध गंगा जल लाओगे तो वहां भी शुद्ध गंगा जल नहीं मिलेगा क्योकि वहाँ की जमीन पर विदेशों का कचरा जमा किया जाता है। यकीन ना हो तो आप लैब में चेक करा लीजिये। गौ-मूत्र विशुद्ध जल का प्रारूप है!
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नस्य

*🙏🏼🌷🙏🏻नस्य🙏🏼🌷🙏🏼*
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*🌺प्रतिदिन नाक में २ -२ बूँद गाय के घी या तिल या सरसों के तेल की डालना हमें बहुत सारे लाभ देता है .तेल या घी को लेट कर नाक में डाले और हल्का सा खिंच ले . ५ मिं लेते रहे .*

🌷इसे प्रतिमर्श नस्य कहा जाता है .
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🌺आयुर्वेद में इसे लेने के १४ समय बताये गए है -
सुबह उठने पर ,दंत धावन, व्यायाम, शरीरसंबंध, मलमूत्र त्याग, भोजन ,वमन , के बाद दिन में सो के उठने पर ,और शाम को . बाहर जाते समय नस्य लेने से प्रदुषण का असर नहीं होगा .- रात में सोते समय नस्य लेने से वात रोगों में लाभ मिलता है;
▶विशेषकर तब जब हम तेज़ पंखे या एसी में सोये .
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*🌺- थायरोइड-स्मरण शक्ति ; इसलिए विद्यार्थियों के लिए लाभकारी-बाल झडना और असमय सफ़ेद होना-दांत के रोगों में जैसे दर्द ,सेंसिटिविटी , मसूड़ों की समस्या- बेहतर केल्शियम एब्ज़ोर्प्शन- लम्बाई बढाता है- नाक की समस्याएँ पोलिप्स , छींकें आना , नाक बंद होना , सर्दी ज़ुकाम- गला खराब होने पर- कान की समस्याएँ- स्नायु शिथिलता- स्टेमिना बढाता है .- अच्छी नींद- सिरदर्द- मानसिक तनाव- नाक के माध्यम से दी गई दवाई का डेढ़ मिं में असर होता है .*

🌺ये ब्रेन पर तुरंत असर करता है क्योंकि यहाँ ब्लड ब्रेन बेरियर नहीं होता .नाक ही ब्रेन का प्रवेश द्वार है .
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*🌺- हिमोग्लोबिन बढ़ता है .- रोगप्रतिरोधक शक्ति बढती है .- हकलाहट में लाभ- होर्मोनल असंतुलन को ठीक करता है .- फेशियल पेरेलिसिस- आँख फड़कना- चोट जल्द भरना- विद्यार्थियों में दिमागी शक्ति बढाने के लिए केसर, ज्येष्ठी मधु ,अश्वगंधा ,ब्राम्ही ,शंखपुष्पी , शतावरी जैसी दवाइयों का अर्क अगर गाय के घी से दिया जाए तो कान और आँखों की शक्ति बढती है ; दिमाग की ग्राह्य क्षमता बढती है-*
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🌺एक शोध में वेखंड ,जटामासी ,वाला आदि जड़ी बूटी युक्त अगरबत्ती जब रात्री में जलाई गयी तो स्मरण शक्ति में सुधार देखा गया .
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*🌺- गर्दन में दर्द- टोंसिल्स- .कुछ विशेष परिस्थितियों में जैसे स्म्रुतिनाश या फिट्स के लिए वैद्य की सलाह से नस्य ले .*
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*👉🏼- नस्य ना लेने का समय* ---- वर्षा ऋतू में जब सूर्य ना हो ; गर्भवती या प्रसव के बाद ;बाल धोने के बाद ; भूक या प्यास लगने पर , बीमार पड़ने पर ;अजीर्ण होने पर ; आघात होने पर या बहुत थका हुआ होने पर ;
अनुवासन बस्ती या विरेचन के बाद .
*अश्विन जोशी 😊🙏🏼*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🅰💲♓🅰💲♓🌺🌸
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कुछ आसान उपाय झाइयाँ मिटाएँ

*💢कुछ आसान उपाय झाइयाँ मिटाएँ💢*
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*🌀झाइयाँ अक्सर बढ़ती उम्र के साथ बढ़ती जाती हैं, जो देखने में अच्छी नहीं लगती हैं। तेज धूप के कारण और शारीरिक स्वास्थ्य ठीक न होनेके कारण भी चेहरे पर झाइयाँ पड़ जाती हैं। झाइयों की समस्या से घरेलू उपचार द्वारा आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।*

*🌀झाइयों को समाप्त करने के कुछ घरेलू उपाय इस प्रकार हैं-*
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*▶झाइयाँ अकसर पेट की खराबी से होती हैं या फिर अधिक तनावग्रस्त रहने से. खुश रहें, चिंता न पालें, पानी खूब पिएँ, दिन में कम से कम एक बार नीबू निचोड़कर पिएँ।*

*▶बरगद का दूध चेहरे पर प्रतिदिन मलें। बीस मिनट बाद ठंडे पानी से धो डालें। बरगद के दूध में बहुत शक्ति व शीतलता होती है। इससे एक सप्ताह में आपकी छाइयाँ समाप्त हो जाएंगी।*
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*▶ सफेद जीरा, काला जीरा, सरसों और काला तिल बराबर मात्रा में लेकर गाय के दूध में पीसकर लेप करने या उबटन करने से झाइयाँ और चेहरे के दाग दूर हो जाते हैं।*

*▶आलू को घिसकर चेहरे पर लगाएँ।* कटे टमाटर को चेहरे पर रगड़ना फायदेमंद होता है।*
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*▶खीरे के रस में जैतुन के तेल की बूँद मिलाकर लगाएँ।*

*▶केले के गुदे को चेहरे पर लगाने से झाइयाँ मिटती हैं।*

*▶ गाजर के रस में पिसी बादाम व कच्चे दूध को मिलाकर लगाएँ।*
🅰💲♓♈♊♑▶
*▶ रोजाना बादाम का तेल चेहरे पर लगाएँ।*

*▶ खरबूज के बीज व छिलकों को थोड़ा पानी मिलाकर बारीक पीस लें। अप इस लेप को चेहरे पर 15 मिनिट तक लगा रहने दें। फिर पानी से चेहरा धो लें। इस पैक को रोजाना चेहरे पर लगाने से आपके चेहरे की झाइयाँ दूर होंगी।*
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*▶ आधी कटोरी उड़द की दाल के पावडर में दो चम्मच गुलाबजल, एक चम्मच ग्लिसरीन व दो चम्मच बादाम रोगन मिलाकर इस लेप को चेहरे पर कुछ देर लगाकर रखें फिर हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।*

*▶चेहरे की झाइयाँ दूर करने के लिए आप आधा नीबू व आधा चम्मच हल्दी और दो चम्मच बेसन लें। अब इन चीजों को आपस में अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट-सा बना लें। अब इस मिश्रण का मास्क चेहरे पर तीन या चार बार लगाए। झाइयाँ समाप्त हो जाएँगी और आपका चेहरा भी निखर जाएगा।*
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*▶ चेहरे पर ताजे नीबू को मलने से भी झाइयों में लाभ होता है।*

*▶चेहरे पर झाइयाँ तेज धूप पड़ने के कारण भी हो जाती हैं। अतः तेज धूप से जहाँ तक हो सके चेहरे को प्रभावित न होने दें।*

*▶ सेब खाने और सेब का गूदा चेहरे पर मलने से भीझाइयाँ दूर होती हैं।*
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*▶ रात को नींद न आने से भी चेहरे पर झाइयाँ पड़जाती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छी तरह धोएँ। तदुपरांत एक चम्मच मलाई में तीन या चार बादाम पीसकर दोनों का मिश्रण बना लें, फिर इस मिश्रण को चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और सो जाएँ। प्रातः उठकर बेसन से चेहरे को धो लें। इस प्रयोग से आपको आश्चर्यजनक लाभ होगा।*

*▶ झाइयों को समाप्त करने के लिए आप भोजन में सलाद का नियमित प्रयोग करें।*
🅰💲♓♈♊♑▶
*▶ दिन में एक गिलास गाजर का रस बिना नमक-मिर्च मिलाए पिएँ, इससे चेहरा तो सुर्ख सफेद होगा ही, साथ ही झाइयाँ भी समाप्त हो जाएँगी।*

*▶ ताजा टमाटर काटकर चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करने से थोड़े दिनों के उपरांत चेहरे कीझाइयाँ कम हो जाएँगी और रंगत भी निखर जाएगी।*
*अश्विन जोशी 😊🙏🏻*
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मूली के जबरदस्त फायदे

*मूली के जबरदस्त फायदे...!!*
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➡हड्डियों को मजबूत करें...

मूली खाने से शरीर की विषैली गैस (कार्बन डाई ऑक्साइड) का निष्कासन होता है तथा जीवनदायी ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है। मूली खाने से दांत मंसूड़े मजबूत होते हैं, हड्डियों में मजबूती आती है। थकान मिटाने और नींद लाने में भी मूली सहायक है।

➡पीलिया में फायदेमंद...

एक कच्ची मूली नित्य प्रातः उठते ही खाते रहने से कुछ दिनों में पीलिया रोग ठीक हो जाता है
   
➡मोटापा से मुक्ति दिलाए...

मोटापा से परेशान हैं तो इसके रस में नींबू व नमक मिला कर नियमित सेवन करें, लाभ होगा।

   
➡पायरिया से राहत...

पायरिया से परेशान लोग मूली के रस से दिन में 2-3 बार कुल्ले करें और इसका रस पिएं तो लाभ होगा। मूली के रस से कुल्ले करना, मसूड़ों-दांतों पर मलना और पीना दांतों के लिये बहुत लाभकारी है। मूली को चबा-चबा कर खाना दांतों व मसूड़ों को निरोग करता है।
   
➡मुंहासो से छुट्टी दिलाए...

मूली में विटामिन सी, जिंक, बी कांप्‍लेक्‍स विटामिन और फॉस्‍फोरस होता है। इसके पत्ते को पिस कर आप अगर अपने चेहरे, हाथो और पैरों पर मलते हैं तो जहां ये शरीर की खुश्की दूर करते हैं वहीं शरीर को कोमल और मुलायम बनाते हैं। मुंहासों के लिए मूली का टुकड़ा गोल काट कर मुंहासों पर लगाएं और तब तक लगाए रखें, जब तक यह खुश्क न हो जाए। थोड़ी देर बाद चेहरे को ठण्डे पानी से धो ले
   
➡पत्ते भी हैं फायदेमंद...

अक्सर लोग मूली खाकर उसके पत्तों को फेंक देते हैं, जबकि पत्तों में भी स्वाद तथा काफी मात्र में पोषक तत्व होते हैं। उन्हें भूजी- सब्जियां, पराठों में प्रयोग करें। इसमें पतली-पतली फलियां भी आती हैं, जिसे मोंगर या मोंगरा के नाम से जाना जाता है। इन फलियों की सब्जियां बहुत स्वादिष्ट बनती हैं। हमेशा छोटी, पतली तथा ताजा मूली का ही प्रयोग करे...!!
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बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगे

*🌾बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगे🌾*
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🌾बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा है, उससे अधिक उसमें गुण भी हैं।
🌾- बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग *आस्टियोपोरोसिस* और खून की कमी यानी *एनीमिया* नहीं होता।
🌾- बाजरा *लीवर* से संबंधित रोगों को भी कम करता है।
🌾- गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में *ऊर्जा* कई गुना है।
🌾- बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है। उधर *आयरन* भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते।
🌾- खासतौर पर गर्भवती महिलाओं ने कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए।
🌾- वरिष्ठ चिकित्साधिकारी मेजर डा. बी.पी. सिंह के सेना में सिक्किम में तैनाती के दौरान जब गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाती थी। इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक *कैल्शियम और आयरन* की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे।
🌾-इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में *असामान्य पीड़ा* के मामले भी न के बराबर पाए गए।
🌾- डाक्टर तो बाजरे के गुणों से इतने प्रभावित है कि इसे अनाजों में *वज्र* की उपाधि देने में जुट गए हैं।
🌾- बाजरे का किसी भी रूप में सेवन लाभकारी है।
- 🌾*लीवर की सुरक्षा* के लिए भी बाजरा खाना लाभकारी है।
🌾- *उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी* के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है।
🌾- यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह *कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्धहोने* की प्रक्रियाओं को दूर करता है।
🌾- रागी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है। *यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद* न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है। यह *माइग्रेन* के लिये भी लाभदायक है।
🌾- इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर *कोलेस्ट्रॉल* की मात्रा को कम करते हैं।
🌾- बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं। *डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर* की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।
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Tuesday, November 29, 2016

राजीव भाई जीवन परिचय

श्री राजीव भाई दीक्षित
भारत स्वाभिमान दल

स्वदेशी के प्रखर प्रवक्ता, चिन्तक , जुझारू निर्भीक व सत्य को द्रढ़ता से रखने की लिए पहचाने जाने वाले भाई राजीव दीक्षित जी 30 नवम्बर 2010 को भिलाई (छत्तीसगढ़) में बलिदान कर दिये गये। वे भारत स्वाभिमान और आज के स्वदेशी आन्दोलन के बलिदानियों में प्रमुख हैं। राजीव भाई भारत स्वाभिमान यात्रा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ प्रवास पर थे। वहीं पर उनकी संदेहस्पद हत्या कर दी गयी। 1 दिसंबर को पतंजलि योगपीठ में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

राजीव भाई के बारे में
राजीव भाई पिछले बीस वर्षों से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद के खिलाफ तथा स्वदेशी की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे भारत को पुनर्गुलामी से बचाना चाहते थे। उनका जन्म उत्तरप्रदेश अतरौली जिले के नाह नाम के गाँव मे 30 नवम्बर 1967 को हुआ। उनकी प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद में हुयी उसके बाद 1984 में उच्च शिक्षा के लिए वे इलाहबाद गए। वे सैटेलाईट टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे लेकिन अपनी B.Tech की शिक्षा बीच में ही छोड़कर देश को विदेशी कंपनियों की लूट से मुक्त कराने और भारत को स्वदेशी बनाने के आन्दोलन में कूद पड़े। इसी बीच उनकी प्रतिभा के कारण CSIR में कुछ परियोजनाओ पर काम करने और विदेशो में शोध पत्र पढने का मौका भी मिला। वे भगतसिंह, उधमसिंह, और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों से प्रभावित रहे। बाद में वे गांधीवाद के षड़यंत्र में फँस गये।

राजीव भाई

भारत को स्वदेशी बनाने में उनका योगदान

पिछले २० वर्षों में राजीव भाई ने भारतीय इतिहास से जो कुछ सीखा उसके बारे में लोगों को जाग्रत किया | अँगरेज़ भारत क्यों आये थे, उन्होंने हमें गुलाम क्यों बनाया, अंग्रेजों ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता, हमारी शिक्षा और उद्योगों को क्यों नष्ट किया, और किस तरह नष्ट किया। इस पर विस्तार से जानकारी दी ताकि हम पुनः गुलाम ना बन सकें। इन बीस वर्षों में राजीव भाई ने लगभग 12000 से अधिक व्याख्यान दिए जिनमें कुछ हमारे पास उपलब्ध हैं। आज भारत में लगभग 5000 से अधिक विदेशी कंपनियां व्यापार करके हमें लूट रही हैं। उनके खिलाफ स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत की। देश में सबसे पहली विस्तृत स्वदेशी-विदेशी वस्तुओं की सूची तैयार करके स्वदेशी अपनाने का आग्रह प्रस्तुत किया। 1991 में डंकल प्रस्तावों के खिलाफ घूम घूम कर जन जाग्रति की और रेलियाँ निकाली। कोका कोला और पेप्सी जैसे पेयों के खिलाफ अभियान चलाया और कानूनी कार्यवाही की।
1991-92 में राजस्थान के अलवर जिले में केडिया कंपनी के शराब कारखानों को बंद करवाने में भूमिका निभाई।

1995-96 में टिहरी बाँध के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चा और संघर्ष किया जहाँ भयंकर लाठीचार्ज में काफी चोटें आई। टिहरी पुलिस ने तो राजीव भाई को मारने की योजना भी बना ली थी।

उसके बाद 1997 में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में गाँधीवादी इतिहासकार धर्मपाल जी को अपना गुरू बना लिया, धर्मपाल जी ने उनको अंग्रेजों के समय के उन ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करवाया जो भारत दल के संस्थापक स्वर्गीय पंचम सिंह कमल ने खोजबीन कर सार्वजनिक कर दिये थे, लेकिन इन दस्तावेजों में भी धर्मपाल जी ने अपनी गांधीवादी प्रवृत्ति के चलते गांधी व गांधीवाद की सच्चाई को प्रकट न होने दिया। राजीव भाई ने देश को जागृत करने का काम किया। पिछले 10 वर्षों से स्वामी रामदेव जी महाराज के संपर्क में रहने के बाद जनवरी 2009 में स्वामीजी के नेतृत्व में भारत स्वाभिमान आन्दोलन का जिम्मा अपने कन्धों पर ले जाते हुए 30 नवम्बर 2010 को छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में भारत स्वाभिमान की रणभूमि में संदिग्ध परिस्थितियों में बलिदान हुए |

राजीव भाई

उनके अधूरे सपनो को पूरा करने का दायित्व अब श्री विश्वजीत सिंह अनंत जी के नेतृत्व में उनके अनुयायियों ने लिया है और देश भर में भारत स्वाभिमान दल के झंडे तले स्वदेशी के चिंतन, दर्शन और क्रान्ति को फैलाने का कार्य शुरू कर दिया हैं। भारत को स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली व संस्कारवान बनाने के इस सम्पूर्ण युद्ध को सतत जारी रखा जायेगा।

सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के इस आंदोलन में सहभागी होकर देश के अमर बलिदानियों के सपनों को पूरा करें। भारत स्वाभिमान दल के सदस्य बनने के लिए सम्पर्क करें
धर्म सिंह
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
85 35 004500, 90 84 955551

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भाई राजीव दीक्षित स्वदेशी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ......

वन्दे मातरम्......